संदेश

हिन्दी दिवस

हिन्दी की शान निराली है, अपने आप में मतवाली है। संस्कृत संग लाड़ लड़ाती, मधुर-मधुर रस बरसाती है। सुंदर, सरल, सुगम और मीठी, हर दिल को लगती है प्रीति। ओजस्विता का संगम है, हिन्दी में अद्भुत दमखम है। आपस में मैत्री बढ़ाती है, सबको अपना बनाती है। साहित्य-साधना हिन्दी है, कवियों की अभिमान हिन्दी है। किसी भाषा से बैर नहीं, सब भाषाओं से प्यार सही। माँ शारदा की आराधना है, भारत की सच्ची साधना है। राष्ट्र के माथे की बिंदी है, भारत की पहचान हिन्दी है। हर दिशा में इसकी शान है, भारत की हिन्दी ही जान है। हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। गरिमा लखनवी

भारत माता

  भारत माता तेरी जय हो, तेरी गोदी में खेले वीर जवानों की जय हो। संस्कारों की जननी, ममता की मूरत, हे भारत माता, तेरी जय हो, तेरी जय हो। तेरी रक्षा में शीश चढ़ाते, वीर सपूत तेरा मान बढ़ाते। सीमा पर डटकर खड़े जवान, उन वीरों को शत-शत प्रणाम। माँ, कब तक रहेगी बेड़ियों में जकड़ी, कब तक सहती रहेगी पीड़ा ये गहरी? तेरे ही बेटे जब तुझे तार-तार करते हैं, अपने स्वार्थ में माँ का सम्मान भूलते हैं। नदियाँ, पर्वत, खेत और धरती, तेरे ही रूप हैं माँ, ये प्रकृति सुहाती। गंगा-यमुना तेरी पावन धारा, तेरी माटी से जग है प्यारा। तेरी शान में शीश नवाते हैं, कोटि-कोटि वंदन तुझे करते हैं। तेरी आन, बान और शान रहे, सदा तिरंगा आसमान में महान रहे। भारत माता तेरी जय हो, वीर जवानों की सदा जय हो। जन-जन के मन में प्रेम जगाए, भारत माता सदा मुस्कुराए। — गरिमा लखनवी

श्री कृष्ण

  देवकी नंदन, नंद के दुलारे, यशोदा मैया के राजदुलारे। मोर मुकुट सिर, अधरों पर बंसी, मन को भाने वाले गिरधारी। वृंदावन की कुंज गलियों में, गोपियों संग रास रचाने वाले। मुरली की मधुर तान सुनाकर, प्रेम का संदेश सुनाने वाले। असुरों का संहार किया, धर्म की ज्योति जगाने वाले। गीता का पावन ज्ञान सुनाकर, कर्म की राह दिखाने वाले। गोवर्धन पर्वत उठाकर, भक्तों की लाज बचाने वाले। दीन-दुखी के तुम रखवाले, सबके कष्ट मिटाने वाले। तेरी बंसी पर गायें मगन हों, तेरी बंसी पर गोपियाँ मगन हों। तेरी बंसी पर नदियाँ झूमें, तेरी धुन में पवन भी मगन हो। राधा के मन के प्यारे मोहन, प्रेम की गंगा बहाने वाले। जग के पालनहार हो कान्हा, सबके मन को हरषाने वाले। माखन चुराकर हँसी बिखेरी, नटखट रूप दिखाने वाले। हर संकट में साथ निभाकर, भक्तों को गले लगाने वाले। तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, जीवन सफल हमारा हो। हे श्री कृष्ण, हे नंदलाला, तुम्हें शत-शत नमन हो। — गरिमा लखनवी

तनाव मुक्त मन, स्वस्थ जीवन

  डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान  के डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों हेतु लेख  स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्य करना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी प्रतिदिन मरीजों की पीड़ा, आपातकालीन परिस्थितियों, लंबे कार्य घंटों, लगातार निर्णय लेने की आवश्यकता और भावनात्मक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे वातावरण में तनाव होना स्वाभाविक है। आवश्यकता इस बात की है कि हम तनाव को समझें, उसके संकेतों को पहचानें और उसे स्वस्थ तरीके से प्रबंधित करना सीखें। तनाव क्या है? विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कार्यस्थल का तनाव उन कार्य-संबंधी मांगों और दबावों के प्रति प्रतिक्रिया है, जो व्यक्ति के ज्ञान, क्षमताओं या सामना करने की क्षमता से अधिक महसूस होने लगते हैं। तनाव केवल कार्यस्थल तक सीमित नहीं है। जन्म से लेकर जीवन के विभिन्न चरणों तक व्यक्ति अलग-अलग प्रकार के दबावों का सामना करता है। बचपन में पढ़ाई और भविष्य की चिंता, युवावस्था में करियर और नौकरी का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ तथा कार्यस्थल की चुनौतियाँ—ये सभी तनाव का कार...

अमर तिरंगा, अमर वतन

ऐ वतन! तेरी शान को कभी न झुकने देंगे, ऐ तिरंगे! तेरा मान कभी न कम होने देंगे। वीरों ने तेरी आन पर प्राण न्योछावर किए, माटी के लिए हँसकर हर दर्द उन्होंने सहे। केसरिया रंग सिखाता त्याग और बलिदान, श्वेत रंग देता जग को शांति का पैगाम। हरा रंग धरती की हरियाली का सम्मान, नीला चक्र कहता—चलते रहो, बढ़ते रहो महान। सीमा पर जवान हमारे प्रहरी बन जाते हैं, माँ भारती की खातिर हँसकर जान लुटाते हैं। उनके शौर्य से ऊँचा तिरंगा लहराता है, हर हिंदुस्तानी के दिल में देशप्रेम जगाता है। अमर रहे तिरंगा, अमर रहे हिंदुस्तान, वीरों के बलिदानों से बढ़ता देश का मान। जन-जन की जुबां पर रहे भारत का जयगान, ऐ तिरंगे! तुझ पर सदा कुर्बान मेरा वतन महान। गरिमा लखनवी

राखी का बंधन

  राखी का त्योहार है प्यारा, भाई-बहन का रिश्ता न्यारा। स्नेह-सुधा से बंधता बंधन, पावन होता प्रेम का आँगन। भाई देता बहना को रक्षा का विश्वास, बहना के चेहरे पर खिलती खुशियों की आस। हर वर्ष ये पर्व नई खुशियाँ लाता, रिश्तों में प्रेम का दीप जलाता। सरहद पर जब वीर जवान, रखते हैं भारत की आन-बान। बहनों की राखी याद दिलाती, मातृभूमि की शान बढ़ाती। राखी केवल धागा नहीं, यह प्रेम, त्याग की गाथा सही। आओ आज संकल्प उठाएँ, हर बहना की लाज बचाएँ। देश की धरती, देश का मान, रहे सदा ऊँचा तिरंगा महान। रक्षा का यह पावन बंधन, जग में सबसे सुंदर बंधन। — गरिमा लखनवी

मुंशी प्रेमचंद जी

  आप आज होते तो कितना सुखद एहसास होता, साहित्य का हर आँगन फिर से आपके पास होता। जन्म आपका हिंदी जगत के लिए वरदान बना, लेखन से मानवता का सुंदर अभियान बना। "पूस की रात" हो या "गोदान" की अमर कहानी, हर रचना में झलकी जन-जन के जीवन की निशानी। सही-गलत का भेद आपने सरल शब्दों में बताया, मानवता का सच्चा पथ दुनिया को दिखलाया। साहित्य की दुनिया में आपकी कमी खलती रहेगी, आपकी अमर लेखनी सदा प्रेरणा देती रहेगी। काश! फिर इस धरा पर आपका आगमन हो जाए, साहित्य का हर कोना फिर से जगमग हो जाए। शब्दों के उस महान साधक को शत-शत प्रणाम, मुंशी प्रेमचंद जी, अमर रहे आपका नाम। — गरिमा लखनवी

पद्मनाभ साहित्य की छठी वर्षगांठ पर

  करोड़ों कलियों में हुआ उदय, आज सबकी आँखों का तारा बन गया। छह वर्षों का यह सुंदर सफर, यादों का अनुपम सहारा बन गया। कुछ खट्टी, कुछ मीठी यादें, हर पल मन को लुभाती हैं। कई कवियों से हुई गुफ़्तगू, नई राहें दिखलाती हैं। सबसे मैंने लिखना सीखा, शब्दों को सुंदर आकार मिला। प्रतिभा दीदी ने हर पल हमको, सही-गलत का ज्ञान दिया। आज जो मेरी कविता सँवरी, उसका श्रेय इस मंच को जाता है। मुझे गर्व है कि मैं भी इसका हिस्सा हूँ, जहाँ बड़ों का स्नेह और आशीष मिलता है। पद्मनाभ साहित्य परिवार की छठी वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएँ। सभी आदरणीय सदस्यों को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम।

कारगिल विजय दिवस

 कारगिल के अमर वीरों को शत-शत नमन छब्बीस जुलाई का वह गौरवशाली दिन, जब भारत ने विजय का परचम लहराया था। कारगिल की दुर्गम चोटियों पर, अपने वीरों ने इतिहास रचाया था। बर्फीली वादियों में सीना ताने, दुश्मन से लोहा लेते रहे। माँ भारती की आन-बान की खातिर, हँसते-हँसते प्राण समर्पित करते रहे। कितनी माँओं की गोद सूनी हो गई, कितनी बहनों की राखी रोती रह गई। कितनी नववधुओं का सिंदूर मिट गया, कितने अरमानों की चिता जल गई। जब तिरंगे में लिपटी अर्थियाँ आईं, हर आँगन मौन खड़ा रह गया। पिता का साहस भी टूट गया, माँ का आँचल आँसुओं से भीग गया। पर उन वीरों ने अंतिम साँस तक, भारत माँ का मान बचाया। अपने रक्त की हर बूँद देकर, तिरंगे का गौरव बढ़ाया। ऐसे रणबाँकुरों के चरणों में, मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है। उनकी वीर माताओं, बहनों और वीरांगनाओं को, मेरा बारंबार प्रणाम है। आओ आज हम सब मिलकर, यह पावन संकल्प उठाएँ। देश की आन, बान और शान की रक्षा में, अपने कर्तव्य सदा निभाएँ। कारगिल के अमर शहीदों! आपका बलिदान अमर रहेगा। जब-जब तिरंगा नभ में लहराएगा, भारत आपका ऋणी रहेगा। गरिमा लखनवी 

डॉक्टर्स डे

  डॉक्टर कितने महान होते हैं, रोगियों के लिए भगवान होते हैं। हम अपना हर दर्द उन्हें बताते हैं, वे हर पीड़ा की पहचान होते हैं। रोगी को स्वस्थ करना आदत है उनकी, उनकी मुस्कान भी दवा का काम करती है। डॉक्टर प्यार से दो शब्द बोल दें, तो रोगी की आधी पीड़ा दूर हो जाती है। कितनी आस लेकर आते हैं रोगी, और स्वस्थ होकर घर लौट जाते हैं। जटिल से जटिल रोगों का उपचार कर, डॉक्टर जीवन में नई उम्मीद जगाते हैं। पर आज कहीं-कहीं डॉक्टरी एक पेशा बन गई है, कुछ लोग अपना कर्तव्य भूल धन कमाने में लग गए हैं। रोगियों की जान अब सस्ती न समझी जाए, मानवता की लौ सदा जलती रहनी चाहिए। डॉक्टर्स डे पर सभी चिकित्सकों से यही अपेक्षा है मेरी, रोगी को रोगी ही समझें, पैसा कमाने की मशीन नहीं। गरिमा लखनवी

जिंदगी की किताब

  जिंदगी की किताब पर हर दिन कुछ नया लिखा जाता है, हर पन्ना अपनी एक अलग कहानी कहता है। यह एक ऐसी अनोखी किताब है, जिसमें हर दिन कुछ न कुछ दर्ज होता है। न जाने कितनी यादों के पन्ने इसमें सिमटे हैं, कुछ सुख के, कुछ दुख के रंगों से लिपटे हैं। इन सभी पन्नों को जोड़कर ही एक किताब बनती है, जो जीवन के हर पल को अपने अंदर समेटती है। बचपन की धुंधली सी यादें, जवानी के रंगीन कुछ पन्ने, और बुढ़ापे के शांत से अध्याय, सब इसमें बड़े प्यार से सजे हैं। यह जिंदगी की किताब बहुत अनमोल है, हर किसी के जीवन का यह सबसे बड़ा मोल है। गरिमा लखनवी

नमामि गंगे जीवन दयानी

 जब हम गंगा मां का नाम लेते हैं तो हमें एक ऐसी नदी का ज्ञान होता है जिसे भागीरथी इस धरती पर लेकर आए थे। गंगा नदी का उद्गम स्थल उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय स्थित गंगोत्री धाम से हुआ था। गंगा एक बहुत ही पवित्र नदी है। जिसके पास आकर सुख और सुकून मिलता है। गंगा भारत में स्थित एक नदी है जो दक्षिण से पूर्व की ओर बहती है; गंगा नदी की लंबाई 2,525 किलोमीटर है और यह उत्तरी भारत के गंगा के मैदानी इलाकों में बहती है। नदी के कई किनारे नेपाल में स्थित हैं, और इसकी दाहिनी सहायक नदी यमुना है। गंगा नदी बांग्लादेश में भी बहती है, जहाँ बांग्लादेश के लोग गंगा को पद्मा कहते हैं। मेरा गंगा मैया से बहुत ही प्यारा रिश्ता है। मुझे इनके गोद में जाकर बड़ा सुकून मिलता है। ऐसा लगता है जैसे सारे दुख दर्द सब खत्म हो गए। हरिद्वार हो या बनारस कानपुर हो या प्रयागराज गंगा के किनारे बैठकर अपनी सारी दुख दर्द को भूल जाती हूं। लगता है जैसे किसी दूसरी दुनिया में आ गए हैं। गंगा के लहरों से खेलने मुझे बहुत अच्छा लगता है, और उसमें वोटिंग करना पानी को हाथ से छूना ऐसा लगता है जैसे हम कहां चले आए।  गंगा में घंटे पर डाल कर ...

वट सावित्री व्रत

वट सावित्री का पावन व्रत, सभी सुहागिन करती हैं, हाथों में पूजा की थाली लेकर, वट वृक्ष की वंदना करती हैं। अखंड सुहाग बना रहे, ऐसी मंगल कामना करती हैं, हर जन्म में साथ मिले प्रिय का, ईश्वर से प्रार्थना करती हैं। घर में सुख-समृद्धि आए, मन में यही अभिलाषा रहती है, वट सावित्री का व्रत करके, सुहाग की आभा बढ़ती है। प्रेम, विश्वास और समर्पण का, यह पावन पर्व कहलाता है, सावित्री के अटल तप से, नारी शक्ति का मान बढ़ाता है। वट सावित्री व्रत की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। गरिमा लखनवी

माँ

  माँ, तुम्हारे जैसा कोई नहीं, भगवान भी तुम्हारे आगे सिर झुकाते हैं। बचपन से आज तक बिना कहे ही, तुम मेरे हर दर्द को जान जाती हो। मेरी भूख, प्यास और नींद का, तुम्हें हर पल एहसास हो जाता है। रातों की तेरी मीठी लोरी, आज भी दिल को बहुत भाती है। मैं चैन से सो जाऊँ इसलिए, तुम रात भर जागा करती थी। मेरी हर छोटी-बड़ी ज़िद को, हँसकर पूरा किया करती थी। मैं छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाऊँ, तुम प्यार से मुझे मना लेती थी। माँ, तुम जैसा कोई नहीं इस जग में, हर माँ को मेरा शत-शत प्रणाम। गरिमा लखनवी

तुम्हारी चाहत

  तुम्हारी चाहत को हम कभी मिटने नहीं देंगे, तुम माँगोगे दर्द, हम खुशी ही देंगे। तुम्हारी मुस्कान हमें सुकून देती है, तुम्हारे आँसू हमें हर पल रुला देते हैं। क्या कहें, कैसे कहें, ये दिल तुम पर आया है, हर धड़कन में बस नाम तुम्हारा ही छाया है। तुम हमें भूल जाओ, ये मुमकिन नहीं होगा, हम तुम्हारी याद को दिल से जाने नहीं देंगे। तुम्हारी हर ख्वाहिश हमें पूरी करनी है, तुम्हारा हर सपना यकीन में बदलना है। तुम्हारी राहों में फूल हम ही बिछाएंगे, तुम्हारे हर ग़म को खुद में ही समाएंगे। रातों की खामोशी में तेरा नाम पुकारें, दिन की हर धूप में तेरी छाया उतारें। तू जो साथ हो तो हर मौसम सुहाना है, तेरे बिना तो ये दिल वीराना है। क्या कहें, कैसे कहें, ये दिल तुम पर आया है, हर धड़कन में बस नाम तुम्हारा ही छाया है। तुम हमें भूल जाओ, ये मुमकिन नहीं होगा, हम तुम्हारी याद को दिल से जाने नहीं देंगे। तेरी हँसी से ही मेरी दुनिया सजती है, तेरी एक झलक से ये रूह महकती है। तू ही मेरी चाहत, तू ही मेरी कहानी है, तेरे बिना ये ज़िंदगी अधूरी-सी निशानी है।

इश्क हो गया है

आँख से आँख लड़ी है, दिल से दिल मिल गया है, क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है। क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है। दिन का चैन उड़ा है, रातों की नींद उड़ी है, तेरी यादों में अब हर एक घड़ी ही कटी है, सपनों में भी तेरा चेहरा नजर आता है, दिल ये हर पल बस तेरा ही गीत गाता है। आँख से आँख लड़ी है… हर पल मुझको तेरी याद सताती है, पल-पल ये आँखें भीग सी जाती हैं, तेरा जाना दिल को बहुत रुलाता है, तेरे बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है… तेरे ख्यालों में ही दिन-रात गुजरते हैं, दिल के जज़्बात अब लफ्ज़ों में उतरते हैं, तू जो मिले तो ये दिल मुस्कुरा जाएगा, तेरे बिना ये सफर अधूरा रह जाएगा। आँख से आँख लड़ी है, दिल से दिल मिल गया है, क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है… गरिमा लखनवी 

पतझड़ के सूखे पत्ते

  पतझड़ के सूखे पत्तों सी हमारी यह जिंदगानी है, टूटकर शाखों से गिरना जैसे इसकी कहानी है। सूखे पत्ते गिरते जाते, चुपचाप बिखर जाते हैं, वैसे ही कुछ रिश्ते भी समय के संग खो जाते हैं। पर हर पतझड़ के बाद यहाँ फिर से बहार आती है, सूनी डाली पर हरियाली नई उमंग जगाती है। जीवन भी कुछ ऐसा ही है, टूटकर फिर जुड़ जाता है, हर अंत के बाद एक नया सवेरा मुस्काता है।

जिंदगी की किताब

  जिंदगी की किताब पर हर दिन कुछ नया लिखा जाता है, हर पन्ना अपनी एक अलग कहानी कहता है। यह एक ऐसी अनोखी किताब है, जिसमें हर दिन कुछ न कुछ दर्ज होता है। न जाने कितनी यादों के पन्ने इसमें सिमटे हैं, कुछ सुख के, कुछ दुख के रंगों से लिपटे हैं। इन सभी पन्नों को जोड़कर ही एक किताब बनती है, जो जीवन के हर पल को अपने अंदर समेटती है। बचपन की धुंधली सी यादें, जवानी के रंगीन कुछ पन्ने, और बुढ़ापे के शांत से अध्याय, सब इसमें बड़े प्यार से सजे हैं। यह जिंदगी की किताब बहुत अनमोल है, हर किसी के जीवन का यह सबसे बड़ा मोल है। गरिमा लखनवी

तेरी याद

  तेरे मिलने की आस हमें बेचैन कर जाती है, तू नहीं आता, तेरी याद ही आ जाती है। तुम जो दूर हो, ये रातें सोने नहीं देतीं, हर धड़कन तेरी ही कहानी सुनाती है। हथेली पर तेरा नाम लिखकर मिटा देते हैं, फिर भी दिल से तेरी तस्वीर न मिट पाती है। तेरा चेहरा निगाहों से दूर नहीं होता, हर एक पल तेरी सूरत ही नजर आती है। बस एक आस दिल में जगी रहती है हरदम, कि तू आएगा, यही उम्मीद जगाती है। तुम न जाने किस जहाँ में जा छुपे हो अब, तेरी याद ही दिल में घर बना जाती है। गरिमा लखनवी

तुम्हारी मुस्कान

  तुम सूर्य की किरण हो, तुम सूर्य की रोशनी हो, तुम्हारी प्यारी मुस्कान में जैसे खिलती चांदनी हो। तुम्हारी मुस्कान कुछ कहती है, जैसे दिल में छुपे कई राज हों, तुम्हारी बातों की मिठास में जैसे मधुर से साज हों। तुम अपने घर की शान हो, तुम सबके दिल की जान हो, तुमसे ही खुशियों का आंगन है, तुमसे ही रोशन जहान हो। अगर तुम न हो इस दुनिया में, तो हर खुशी वीरान लगे, तुम हो तो हर सुबह सुनहरी, हर सपना आसान लगे। तुम सबके दिलों पर राज करती हो, सबको अपना बना लेती हो, सच में तुम वो किरण हो, जो जीवन में उजाला भर देती हो।  गरिमा लखनवी