इश्क हो गया है



आँख से आँख लड़ी है, दिल से दिल मिल गया है,

क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है।

क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है।


दिन का चैन उड़ा है, रातों की नींद उड़ी है,

तेरी यादों में अब हर एक घड़ी ही कटी है,

सपनों में भी तेरा चेहरा नजर आता है,

दिल ये हर पल बस तेरा ही गीत गाता है।


आँख से आँख लड़ी है…


हर पल मुझको तेरी याद सताती है,

पल-पल ये आँखें भीग सी जाती हैं,

तेरा जाना दिल को बहुत रुलाता है,

तेरे बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता है।


क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है…


तेरे ख्यालों में ही दिन-रात गुजरते हैं,

दिल के जज़्बात अब लफ्ज़ों में उतरते हैं,

तू जो मिले तो ये दिल मुस्कुरा जाएगा,

तेरे बिना ये सफर अधूरा रह जाएगा।

आँख से आँख लड़ी है, दिल से दिल मिल गया है,

क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है…

गरिमा लखनवी 

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