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जिंदगी की किताब

  जिंदगी की किताब पर हर दिन कुछ नया लिखा जाता है, हर पन्ना अपनी एक अलग कहानी कहता है। यह एक ऐसी अनोखी किताब है, जिसमें हर दिन कुछ न कुछ दर्ज होता है। न जाने कितनी यादों के पन्ने इसमें सिमटे हैं, कुछ सुख के, कुछ दुख के रंगों से लिपटे हैं। इन सभी पन्नों को जोड़कर ही एक किताब बनती है, जो जीवन के हर पल को अपने अंदर समेटती है। बचपन की धुंधली सी यादें, जवानी के रंगीन कुछ पन्ने, और बुढ़ापे के शांत से अध्याय, सब इसमें बड़े प्यार से सजे हैं। यह जिंदगी की किताब बहुत अनमोल है, हर किसी के जीवन का यह सबसे बड़ा मोल है। गरिमा लखनवी

नमामि गंगे जीवन दयानी

 जब हम गंगा मां का नाम लेते हैं तो हमें एक ऐसी नदी का ज्ञान होता है जिसे भागीरथी इस धरती पर लेकर आए थे। गंगा नदी का उद्गम स्थल उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय स्थित गंगोत्री धाम से हुआ था। गंगा एक बहुत ही पवित्र नदी है। जिसके पास आकर सुख और सुकून मिलता है। गंगा भारत में स्थित एक नदी है जो दक्षिण से पूर्व की ओर बहती है; गंगा नदी की लंबाई 2,525 किलोमीटर है और यह उत्तरी भारत के गंगा के मैदानी इलाकों में बहती है। नदी के कई किनारे नेपाल में स्थित हैं, और इसकी दाहिनी सहायक नदी यमुना है। गंगा नदी बांग्लादेश में भी बहती है, जहाँ बांग्लादेश के लोग गंगा को पद्मा कहते हैं। मेरा गंगा मैया से बहुत ही प्यारा रिश्ता है। मुझे इनके गोद में जाकर बड़ा सुकून मिलता है। ऐसा लगता है जैसे सारे दुख दर्द सब खत्म हो गए। हरिद्वार हो या बनारस कानपुर हो या प्रयागराज गंगा के किनारे बैठकर अपनी सारी दुख दर्द को भूल जाती हूं। लगता है जैसे किसी दूसरी दुनिया में आ गए हैं। गंगा के लहरों से खेलने मुझे बहुत अच्छा लगता है, और उसमें वोटिंग करना पानी को हाथ से छूना ऐसा लगता है जैसे हम कहां चले आए।  गंगा में घंटे पर डाल कर ...

वट सावित्री व्रत

वट सावित्री का पावन व्रत, सभी सुहागिन करती हैं, हाथों में पूजा की थाली लेकर, वट वृक्ष की वंदना करती हैं। अखंड सुहाग बना रहे, ऐसी मंगल कामना करती हैं, हर जन्म में साथ मिले प्रिय का, ईश्वर से प्रार्थना करती हैं। घर में सुख-समृद्धि आए, मन में यही अभिलाषा रहती है, वट सावित्री का व्रत करके, सुहाग की आभा बढ़ती है। प्रेम, विश्वास और समर्पण का, यह पावन पर्व कहलाता है, सावित्री के अटल तप से, नारी शक्ति का मान बढ़ाता है। वट सावित्री व्रत की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। गरिमा लखनवी

माँ

  माँ, तुम्हारे जैसा कोई नहीं, भगवान भी तुम्हारे आगे सिर झुकाते हैं। बचपन से आज तक बिना कहे ही, तुम मेरे हर दर्द को जान जाती हो। मेरी भूख, प्यास और नींद का, तुम्हें हर पल एहसास हो जाता है। रातों की तेरी मीठी लोरी, आज भी दिल को बहुत भाती है। मैं चैन से सो जाऊँ इसलिए, तुम रात भर जागा करती थी। मेरी हर छोटी-बड़ी ज़िद को, हँसकर पूरा किया करती थी। मैं छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाऊँ, तुम प्यार से मुझे मना लेती थी। माँ, तुम जैसा कोई नहीं इस जग में, हर माँ को मेरा शत-शत प्रणाम। गरिमा लखनवी

तुम्हारी चाहत

  तुम्हारी चाहत को हम कभी मिटने नहीं देंगे, तुम माँगोगे दर्द, हम खुशी ही देंगे। तुम्हारी मुस्कान हमें सुकून देती है, तुम्हारे आँसू हमें हर पल रुला देते हैं। क्या कहें, कैसे कहें, ये दिल तुम पर आया है, हर धड़कन में बस नाम तुम्हारा ही छाया है। तुम हमें भूल जाओ, ये मुमकिन नहीं होगा, हम तुम्हारी याद को दिल से जाने नहीं देंगे। तुम्हारी हर ख्वाहिश हमें पूरी करनी है, तुम्हारा हर सपना यकीन में बदलना है। तुम्हारी राहों में फूल हम ही बिछाएंगे, तुम्हारे हर ग़म को खुद में ही समाएंगे। रातों की खामोशी में तेरा नाम पुकारें, दिन की हर धूप में तेरी छाया उतारें। तू जो साथ हो तो हर मौसम सुहाना है, तेरे बिना तो ये दिल वीराना है। क्या कहें, कैसे कहें, ये दिल तुम पर आया है, हर धड़कन में बस नाम तुम्हारा ही छाया है। तुम हमें भूल जाओ, ये मुमकिन नहीं होगा, हम तुम्हारी याद को दिल से जाने नहीं देंगे। तेरी हँसी से ही मेरी दुनिया सजती है, तेरी एक झलक से ये रूह महकती है। तू ही मेरी चाहत, तू ही मेरी कहानी है, तेरे बिना ये ज़िंदगी अधूरी-सी निशानी है।

इश्क हो गया है

आँख से आँख लड़ी है, दिल से दिल मिल गया है, क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है। क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है। दिन का चैन उड़ा है, रातों की नींद उड़ी है, तेरी यादों में अब हर एक घड़ी ही कटी है, सपनों में भी तेरा चेहरा नजर आता है, दिल ये हर पल बस तेरा ही गीत गाता है। आँख से आँख लड़ी है… हर पल मुझको तेरी याद सताती है, पल-पल ये आँखें भीग सी जाती हैं, तेरा जाना दिल को बहुत रुलाता है, तेरे बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है… तेरे ख्यालों में ही दिन-रात गुजरते हैं, दिल के जज़्बात अब लफ्ज़ों में उतरते हैं, तू जो मिले तो ये दिल मुस्कुरा जाएगा, तेरे बिना ये सफर अधूरा रह जाएगा। आँख से आँख लड़ी है, दिल से दिल मिल गया है, क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है… गरिमा लखनवी 

पतझड़ के सूखे पत्ते

  पतझड़ के सूखे पत्तों सी हमारी यह जिंदगानी है, टूटकर शाखों से गिरना जैसे इसकी कहानी है। सूखे पत्ते गिरते जाते, चुपचाप बिखर जाते हैं, वैसे ही कुछ रिश्ते भी समय के संग खो जाते हैं। पर हर पतझड़ के बाद यहाँ फिर से बहार आती है, सूनी डाली पर हरियाली नई उमंग जगाती है। जीवन भी कुछ ऐसा ही है, टूटकर फिर जुड़ जाता है, हर अंत के बाद एक नया सवेरा मुस्काता है।