माँ सिद्धिदात्री
लाल चुनरिया ओढ़कर मैया, कमल पर विराजती है, जो भी भक्त करे तेरी पूजा, मनोकामना पूर्ण करती है। अष्ट सिद्धि नव निधि की दाता, रखना हाथ दया का माँ, शंख, चक्र और गदा धारण कर, सिद्धियाँ देती हो माँ। मन, बुद्धि और विद्या देना, ज्ञान का दीप जलाना माँ, भटके हुए हम भक्तों को, सही राह दिखाना माँ। जो तेरी पूजा नित दिन करता, उसके कष्ट मिटाती हो, तेरे द्वार से कोई खाली न जाए, सबकी झोली भरती हो। तेरी महिमा अपरंपार माँ, तेरी लीला न्यारी है, तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, माँ तू जग से प्यारी है। जय माँ सिद्धिदात्री! गरिमा लखनवी