तुम्हारी मुस्कान
तुम सूर्य की किरण हो, तुम सूर्य की रोशनी हो, तुम्हारी प्यारी मुस्कान में जैसे खिलती चांदनी हो। तुम्हारी मुस्कान कुछ कहती है, जैसे दिल में छुपे कई राज हों, तुम्हारी बातों की मिठास में जैसे मधुर से साज हों। तुम अपने घर की शान हो, तुम सबके दिल की जान हो, तुमसे ही खुशियों का आंगन है, तुमसे ही रोशन जहान हो। अगर तुम न हो इस दुनिया में, तो हर खुशी वीरान लगे, तुम हो तो हर सुबह सुनहरी, हर सपना आसान लगे। तुम सबके दिलों पर राज करती हो, सबको अपना बना लेती हो, सच में तुम वो किरण हो, जो जीवन में उजाला भर देती हो। गरिमा लखनवी