संदेश

मेहंदी का रंग

  मेहंदी लगे इन हाथों में, रंग सजे प्यार का, साजन का दीदार हो, मौसम हो बहार का। मेहंदी के रंग में डूबकर, दिल यही कहता है, तुम ही मेरा प्यार हो, दिल तुममें ही रहता है। तुमसे मेरी खुशियाँ हैं, तुमसे मेरा जीवन है, तुमसे ही मेरी सुबह है, तुमसे मेरी हर धड़कन है। तुम हो तो हर रात दिवाली, हर दिन लगता होली है, तेरे प्यार से सज गई सजना, जीवन की हर रंगोली है। मेहंदी लगे हाथों में, जब चूड़ी खनकती है, लगता है संसार की खुशियाँ, मेरी झोली में आती हैं। दिन-रात सजना, तेरे लिए सजती-सँवरती हूँ, तेरे प्यार की खुशबू से, मैं हर पल महकती हूँ। तू है तो जीवन जन्नत है, तू ही मेरा संसार, जन्म-जन्म तक बना रहे, सजना तेरा मेरा प्यार। गरिमा लखनवी

चाँद साक्षी है

चाँद साक्षी है हमारे मिलन का, चाँद साक्षी है हम दोनों के बंधन का। चाँद साक्षी है हमारे दुख-दर्द का, चाँद साक्षी है जीवन के हर सुख का। चाँद साक्षी है साथ बिताए उन पलों का, चाँद साक्षी है मेरे सोलह शृंगार का। चाँद साक्षी है मेरे हर व्रत-त्योहार का, चाँद साक्षी है हर करवाचौथ के इंतज़ार का। चाँद साक्षी है मेरे त्याग और तपस्या का, चाँद साक्षी है तुम्हारे हर प्रयास का। चाँद साक्षी है हमारी हर एक प्रार्थना का, चाँद साक्षी है प्रेम से भरे हर वादे का। चाँद साक्षी है मेरे अटूट विश्वास का, चाँद साक्षी है तुम्हारे मेरे साथ का। हर जन्म में बस तुम्हारा साथ मिले, हमारे प्रेम को चाँद का आशीर्वाद मिले। चाँद साक्षी है इस पावन प्यार का, चाँद साक्षी है सात जन्मों के इस संसार का।  गरिमा लखनवी

माँ सिद्धिदात्री

लाल चुनरिया ओढ़कर मैया, कमल पर विराजती है, जो भी भक्त करे तेरी पूजा, मनोकामना पूर्ण करती है। अष्ट सिद्धि नव निधि की दाता, रखना हाथ दया का माँ, शंख, चक्र और गदा धारण कर, सिद्धियाँ देती हो माँ। मन, बुद्धि और विद्या देना, ज्ञान का दीप जलाना माँ, भटके हुए हम भक्तों को, सही राह दिखाना माँ। जो तेरी पूजा नित दिन करता, उसके कष्ट मिटाती हो, तेरे द्वार से कोई खाली न जाए, सबकी झोली भरती हो। तेरी महिमा अपरंपार माँ, तेरी लीला न्यारी है, तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, माँ तू जग से प्यारी है। जय माँ सिद्धिदात्री!  गरिमा लखनवी

लाल बहादुर शास्त्री

दो अक्टूबर उन्नीस सौ चार को, मुगलसराय में जन्म हुआ। माता रामदुलारी, पिता शारदा प्रसाद, घर में खुशियों का आगमन हुआ। काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि पाई, स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका निभाई। असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन में, देश की आजादी की अलख जगाई। नौ जून उन्नीस सौ चौंसठ को, भारत के प्रधानमंत्री बने। सादगी और ईमानदारी के प्रतीक, जन-जन के दिलों में बसने लगे। पैंसठ के भारत-पाक युद्ध में, भारत ने विजय पताका फहराई। “जय जवान, जय किसान” का नारा देकर, देश में नई चेतना जगाई। हरित क्रांति को बढ़ावा दिया, श्वेत क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया। देशहित में उपवास की पहल करके, त्याग और समर्पण का संदेश दिया। ग्यारह जनवरी उन्नीस सौ छियासठ को, ताशकंद में उनका निधन हुआ। उनके निधन से जुड़ी अनसुलझी चर्चाओं ने, आज तक मन में प्रश्न खड़ा किया। मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित, ऐसे महापुरुष को मेरा शत-शत नमन। देशभक्ति, सादगी और सत्य के प्रतीक, शास्त्री जी को कोटि-कोटि वंदन। — गरिमा लखनवी

माँ ब्रह्मचारिणी की महिमा

माँ की महिमा निराली है, तेरी शक्ति जग से न्यारी है। तेरी महिमा वेदों ने गाई, तेरे चरणों में दुनिया समाई। तप और आचरण का पाठ पढ़ाती, त्याग-तपस्या की मूरत कहलाती। धैर्य और संयम का ज्ञान सिखाती, भक्तों के जीवन में ज्योत जलाती। जो भी तेरा दर्शन पाए, तेरे चरणों में शीश नवाए। ज्ञान और तप की तुम हो दाता, भक्तों के कष्टों को हरने वाली माता। तेरे दर्शन से शांति मिलती, मन में श्रद्धा की ज्योति खिलती। भवसागर से पार उतारो, मैया! सब पर कृपा बरसाओ। जय माँ ब्रह्मचारिणी!  — गरिमा लखनवी

"साहित्य साथी मेरा" दमयंती जोशी

मिला साथ दीदी का, लेखनी में आया निखार, हर मोड़ पर दिया उन्होंने, स्नेह भरा उपहार। राजश्री परिवार से जुड़कर, पाया सुंदर साथ, दीदी के स्नेह-सानिध्य ने, रोशन की मेरी राह। मेरी कविता की हर कमी को, दीदी ने पहचान, प्रेरणा देकर हर पल मुझको, बढ़ाया मेरा मान। दीदी मेरी प्यारी-दुलारी, बातें मन को भातीं, उनकी मीठी सीख और बातें, नई दिशा दिखातीं। हर रचना में उनका स्नेह, बनकर रहता आधार, उनके आशीष से महकता, मेरा साहित्य संसार। राजश्री परिवार यूँ ही, सदा बढ़ाता रहे सम्मान, दीदी का आशीर्वाद मिले, यही है मेरी अरमान। गरिमा लखनवी

छोड़ दीजिए

  ज़िंदगी में कोई काम ऐसा हो, जो आपको अच्छा न लगे, उसे छोड़ दीजिए। किसी का साथ दिल को रास न आए, तो ऐसे रिश्ते को भी छोड़ दीजिए। किसी चीज़ के पीछे यूँ मत भागिए, जो वक्त पर मिलना हो, उसे वक्त पर छोड़ दीजिए। कोई काम आपका बन नहीं रहा हो, तो उसे भी किस्मत पर छोड़ दीजिए। जो आपको मिलना होगा, मिलकर रहेगा, इसलिए हर बात की फिक्र करना छोड़ दीजिए। दूसरों की चिंता में अपनी ज़िंदगी न भूलिए, अपने लिए भी थोड़ा जीना सीख लीजिए। जो आपके साथ चले, उसका साथ निभाइए, जो रास्ते में रुक जाए, उसे छोड़ दीजिए। हर शिकायत का हिसाब रखना छोड़ दीजिए, दिल में बोझ बनाकर कुछ भी मत रखिए। सबके दुख को अपना समझना छोड़ दीजिए, हर किसी का दर्द अपने दिल में न रखिए। ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जो बुरा है, उसे वहीं छोड़ दीजिए। जिनसे भी मिलें, उनकी कमियाँ वहीं छोड़ आइए, हर बात को दिल से लगाना छोड़ दीजिए। ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है, इसे यूँ न गँवाइए, जो सुकून छीन ले—उसे बस छोड़ दीजिए। — गरिमा लखनवी