संदेश

इश्क हो गया है

आँख से आँख लड़ी है, दिल से दिल मिल गया है, क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है। क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है। दिन का चैन उड़ा है, रातों की नींद उड़ी है, तेरी यादों में अब हर एक घड़ी ही कटी है, सपनों में भी तेरा चेहरा नजर आता है, दिल ये हर पल बस तेरा ही गीत गाता है। आँख से आँख लड़ी है… हर पल मुझको तेरी याद सताती है, पल-पल ये आँखें भीग सी जाती हैं, तेरा जाना दिल को बहुत रुलाता है, तेरे बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है… तेरे ख्यालों में ही दिन-रात गुजरते हैं, दिल के जज़्बात अब लफ्ज़ों में उतरते हैं, तू जो मिले तो ये दिल मुस्कुरा जाएगा, तेरे बिना ये सफर अधूरा रह जाएगा। आँख से आँख लड़ी है, दिल से दिल मिल गया है, क्या कहें, कैसे कहें—हमको इश्क हो गया है… गरिमा लखनवी 

पतझड़ के सूखे पत्ते

  पतझड़ के सूखे पत्तों सी हमारी यह जिंदगानी है, टूटकर शाखों से गिरना जैसे इसकी कहानी है। सूखे पत्ते गिरते जाते, चुपचाप बिखर जाते हैं, वैसे ही कुछ रिश्ते भी समय के संग खो जाते हैं। पर हर पतझड़ के बाद यहाँ फिर से बहार आती है, सूनी डाली पर हरियाली नई उमंग जगाती है। जीवन भी कुछ ऐसा ही है, टूटकर फिर जुड़ जाता है, हर अंत के बाद एक नया सवेरा मुस्काता है।

जिंदगी की किताब

  जिंदगी की किताब पर हर दिन कुछ नया लिखा जाता है, हर पन्ना अपनी एक अलग कहानी कहता है। यह एक ऐसी अनोखी किताब है, जिसमें हर दिन कुछ न कुछ दर्ज होता है। न जाने कितनी यादों के पन्ने इसमें सिमटे हैं, कुछ सुख के, कुछ दुख के रंगों से लिपटे हैं। इन सभी पन्नों को जोड़कर ही एक किताब बनती है, जो जीवन के हर पल को अपने अंदर समेटती है। बचपन की धुंधली सी यादें, जवानी के रंगीन कुछ पन्ने, और बुढ़ापे के शांत से अध्याय, सब इसमें बड़े प्यार से सजे हैं। यह जिंदगी की किताब बहुत अनमोल है, हर किसी के जीवन का यह सबसे बड़ा मोल है। गरिमा लखनवी

तेरी याद

  तेरे मिलने की आस हमें बेचैन कर जाती है, तू नहीं आता, तेरी याद ही आ जाती है। तुम जो दूर हो, ये रातें सोने नहीं देतीं, हर धड़कन तेरी ही कहानी सुनाती है। हथेली पर तेरा नाम लिखकर मिटा देते हैं, फिर भी दिल से तेरी तस्वीर न मिट पाती है। तेरा चेहरा निगाहों से दूर नहीं होता, हर एक पल तेरी सूरत ही नजर आती है। बस एक आस दिल में जगी रहती है हरदम, कि तू आएगा, यही उम्मीद जगाती है। तुम न जाने किस जहाँ में जा छुपे हो अब, तेरी याद ही दिल में घर बना जाती है। गरिमा लखनवी

तुम्हारी मुस्कान

  तुम सूर्य की किरण हो, तुम सूर्य की रोशनी हो, तुम्हारी प्यारी मुस्कान में जैसे खिलती चांदनी हो। तुम्हारी मुस्कान कुछ कहती है, जैसे दिल में छुपे कई राज हों, तुम्हारी बातों की मिठास में जैसे मधुर से साज हों। तुम अपने घर की शान हो, तुम सबके दिल की जान हो, तुमसे ही खुशियों का आंगन है, तुमसे ही रोशन जहान हो। अगर तुम न हो इस दुनिया में, तो हर खुशी वीरान लगे, तुम हो तो हर सुबह सुनहरी, हर सपना आसान लगे। तुम सबके दिलों पर राज करती हो, सबको अपना बना लेती हो, सच में तुम वो किरण हो, जो जीवन में उजाला भर देती हो।  गरिमा लखनवी 

ऐ दोस्त

बेवजह क्यों मुस्करा रहे हो तुम, किसकी राहों में अब जा रहे हो तुम। हमसे रूठे हो या कोई और सबब है, बिना बताए क्यूँ दूर जा रहे हो तुम। हमने समझा था अपना तुमको ही हमेशा, फिर भी बेगाना हमें बना रहे हो तुम। हर शाम तुम्हारे साथ गुजरनी थी जो, उस वादे से भी मुँह मोड़ जा रहे हो तुम। कितने सपनों की नींव रखी थी हमने, एक भी सपना पूरा न कर सके तुम। ऐ दोस्त, तुम ही जिंदगी के हसीन पल हो, फिर क्यों किसी और की तरफ झुक रहे हो तुम। बेवजह क्यों मुस्करा रहे हो तुम, आख़िर किसके पास जा रहे हो तुम। — गरिमा लखनवी

प्यार

 दर्द में डूबी हुई आंखें दिखाऊं कैसे, प्यार का आपसे इज़हार छुपाऊं कैसे। मौत आती है मगर कोई तमन्ना लेकर, जिंदगी बोल तुझे जीना सिखाऊं कैसे। रात आती है हमेशा तेरी यादें लेकर, ये बता यादों को इस दिल से मिटाऊं कैसे। मुझको आवाज़ लगाते हैं दुखों के साए ज़िंदगी मैं तुझे खुशियों से सजाऊं कैसे। पांव जकड़े हैं मेरे बेड़ियां मजबूरी की तू ही बतला कि तेरे पास मैं आऊं कैसे गरिमा