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वट सावित्री व्रत

वट सावित्री का पावन व्रत, सभी सुहागिन करती हैं, हाथों में पूजा की थाली लेकर, वट वृक्ष की वंदना करती हैं। अखंड सुहाग बना रहे, ऐसी मंगल कामना करती हैं, हर जन्म में साथ मिले प्रिय का, ईश्वर से प्रार्थना करती हैं। घर में सुख-समृद्धि आए, मन में यही अभिलाषा रहती है, वट सावित्री का व्रत करके, सुहाग की आभा बढ़ती है। प्रेम, विश्वास और समर्पण का, यह पावन पर्व कहलाता है, सावित्री के अटल तप से, नारी शक्ति का मान बढ़ाता है। वट सावित्री व्रत की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। गरिमा लखनवी

माँ

  माँ, तुम्हारे जैसा कोई नहीं, भगवान भी तुम्हारे आगे सिर झुकाते हैं। बचपन से आज तक बिना कहे ही, तुम मेरे हर दर्द को जान जाती हो। मेरी भूख, प्यास और नींद का, तुम्हें हर पल एहसास हो जाता है। रातों की तेरी मीठी लोरी, आज भी दिल को बहुत भाती है। मैं चैन से सो जाऊँ इसलिए, तुम रात भर जागा करती थी। मेरी हर छोटी-बड़ी ज़िद को, हँसकर पूरा किया करती थी। मैं छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाऊँ, तुम प्यार से मुझे मना लेती थी। माँ, तुम जैसा कोई नहीं इस जग में, हर माँ को मेरा शत-शत प्रणाम। गरिमा लखनवी