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तनाव मुक्त मन, स्वस्थ जीवन

  डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान  के डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों हेतु लेख  स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्य करना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी प्रतिदिन मरीजों की पीड़ा, आपातकालीन परिस्थितियों, लंबे कार्य घंटों, लगातार निर्णय लेने की आवश्यकता और भावनात्मक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे वातावरण में तनाव होना स्वाभाविक है। आवश्यकता इस बात की है कि हम तनाव को समझें, उसके संकेतों को पहचानें और उसे स्वस्थ तरीके से प्रबंधित करना सीखें। तनाव क्या है? विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कार्यस्थल का तनाव उन कार्य-संबंधी मांगों और दबावों के प्रति प्रतिक्रिया है, जो व्यक्ति के ज्ञान, क्षमताओं या सामना करने की क्षमता से अधिक महसूस होने लगते हैं। तनाव केवल कार्यस्थल तक सीमित नहीं है। जन्म से लेकर जीवन के विभिन्न चरणों तक व्यक्ति अलग-अलग प्रकार के दबावों का सामना करता है। बचपन में पढ़ाई और भविष्य की चिंता, युवावस्था में करियर और नौकरी का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ तथा कार्यस्थल की चुनौतियाँ—ये सभी तनाव का कार...

अमर तिरंगा, अमर वतन

ऐ वतन! तेरी शान को कभी न झुकने देंगे, ऐ तिरंगे! तेरा मान कभी न कम होने देंगे। वीरों ने तेरी आन पर प्राण न्योछावर किए, माटी के लिए हँसकर हर दर्द उन्होंने सहे। केसरिया रंग सिखाता त्याग और बलिदान, श्वेत रंग देता जग को शांति का पैगाम। हरा रंग धरती की हरियाली का सम्मान, नीला चक्र कहता—चलते रहो, बढ़ते रहो महान। सीमा पर जवान हमारे प्रहरी बन जाते हैं, माँ भारती की खातिर हँसकर जान लुटाते हैं। उनके शौर्य से ऊँचा तिरंगा लहराता है, हर हिंदुस्तानी के दिल में देशप्रेम जगाता है। अमर रहे तिरंगा, अमर रहे हिंदुस्तान, वीरों के बलिदानों से बढ़ता देश का मान। जन-जन की जुबां पर रहे भारत का जयगान, ऐ तिरंगे! तुझ पर सदा कुर्बान मेरा वतन महान। गरिमा लखनवी

राखी का बंधन

  राखी का त्योहार है प्यारा, भाई-बहन का रिश्ता न्यारा। स्नेह-सुधा से बंधता बंधन, पावन होता प्रेम का आँगन। भाई देता बहना को रक्षा का विश्वास, बहना के चेहरे पर खिलती खुशियों की आस। हर वर्ष ये पर्व नई खुशियाँ लाता, रिश्तों में प्रेम का दीप जलाता। सरहद पर जब वीर जवान, रखते हैं भारत की आन-बान। बहनों की राखी याद दिलाती, मातृभूमि की शान बढ़ाती। राखी केवल धागा नहीं, यह प्रेम, त्याग की गाथा सही। आओ आज संकल्प उठाएँ, हर बहना की लाज बचाएँ। देश की धरती, देश का मान, रहे सदा ऊँचा तिरंगा महान। रक्षा का यह पावन बंधन, जग में सबसे सुंदर बंधन। — गरिमा लखनवी

मुंशी प्रेमचंद जी

  आप आज होते तो कितना सुखद एहसास होता, साहित्य का हर आँगन फिर से आपके पास होता। जन्म आपका हिंदी जगत के लिए वरदान बना, लेखन से मानवता का सुंदर अभियान बना। "पूस की रात" हो या "गोदान" की अमर कहानी, हर रचना में झलकी जन-जन के जीवन की निशानी। सही-गलत का भेद आपने सरल शब्दों में बताया, मानवता का सच्चा पथ दुनिया को दिखलाया। साहित्य की दुनिया में आपकी कमी खलती रहेगी, आपकी अमर लेखनी सदा प्रेरणा देती रहेगी। काश! फिर इस धरा पर आपका आगमन हो जाए, साहित्य का हर कोना फिर से जगमग हो जाए। शब्दों के उस महान साधक को शत-शत प्रणाम, मुंशी प्रेमचंद जी, अमर रहे आपका नाम। — गरिमा लखनवी

पद्मनाभ साहित्य की छठी वर्षगांठ पर

  करोड़ों कलियों में हुआ उदय, आज सबकी आँखों का तारा बन गया। छह वर्षों का यह सुंदर सफर, यादों का अनुपम सहारा बन गया। कुछ खट्टी, कुछ मीठी यादें, हर पल मन को लुभाती हैं। कई कवियों से हुई गुफ़्तगू, नई राहें दिखलाती हैं। सबसे मैंने लिखना सीखा, शब्दों को सुंदर आकार मिला। प्रतिभा दीदी ने हर पल हमको, सही-गलत का ज्ञान दिया। आज जो मेरी कविता सँवरी, उसका श्रेय इस मंच को जाता है। मुझे गर्व है कि मैं भी इसका हिस्सा हूँ, जहाँ बड़ों का स्नेह और आशीष मिलता है। पद्मनाभ साहित्य परिवार की छठी वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएँ। सभी आदरणीय सदस्यों को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम।