माँ

 

माँ, तुम्हारे जैसा कोई नहीं,

भगवान भी तुम्हारे आगे सिर झुकाते हैं।

बचपन से आज तक बिना कहे ही,

तुम मेरे हर दर्द को जान जाती हो।

मेरी भूख, प्यास और नींद का,

तुम्हें हर पल एहसास हो जाता है।

रातों की तेरी मीठी लोरी,

आज भी दिल को बहुत भाती है।

मैं चैन से सो जाऊँ इसलिए,

तुम रात भर जागा करती थी।

मेरी हर छोटी-बड़ी ज़िद को,

हँसकर पूरा किया करती थी।

मैं छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाऊँ,

तुम प्यार से मुझे मना लेती थी।

माँ, तुम जैसा कोई नहीं इस जग में,

हर माँ को मेरा शत-शत प्रणाम।

गरिमा लखनवी

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