पद्मनाभ साहित्य की छठी वर्षगांठ पर

 


करोड़ों कलियों में हुआ उदय,

आज सबकी आँखों का तारा बन गया।

छह वर्षों का यह सुंदर सफर,

यादों का अनुपम सहारा बन गया।


कुछ खट्टी, कुछ मीठी यादें,

हर पल मन को लुभाती हैं।

कई कवियों से हुई गुफ़्तगू,

नई राहें दिखलाती हैं।


सबसे मैंने लिखना सीखा,

शब्दों को सुंदर आकार मिला।

प्रतिभा दीदी ने हर पल हमको,

सही-गलत का ज्ञान दिया।


आज जो मेरी कविता सँवरी,

उसका श्रेय इस मंच को जाता है।

मुझे गर्व है कि मैं भी इसका हिस्सा हूँ,

जहाँ बड़ों का स्नेह और आशीष मिलता है।


पद्मनाभ साहित्य परिवार की

छठी वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएँ।

सभी आदरणीय सदस्यों को

मेरा कोटि-कोटि प्रणाम।

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