संदेश

जिंदगी से प्यार

  तुम जिंदगी से  क्यों हार मान गए गये  ऐसे तो न थे तुम, जिंदगी को जीने वाले थे तुम सबको हँसना सिखाते थे तुम और  आज खुद ही रो दिए। क्या हुआ जो कोई छूट गया? क्या हुआ जो दिल गया ?  पर खुश रहना आता था तुमको चाहे कोई भी समय हो जिंदगी हराने का नाम नहीं है जिंदगी लड़ने का नाम है चाहे  कुछ भी हो जाये तुम खुश रहोगे तुम्हारी पहचान तुम्हारा हसमुख स्वाभाव है तुम नहीं तो कुछ नही नहीं है सारी  खुशिया तुमसे ही है क्या हुआ जो कोई दुःख आया तुम इतना हिल गए दुःख एक काली रात है  उसे भूलकर फिर से मुस्कुराओ
 आशा है तो सब कुछ है  बहुत कठिन समय है आज,  आशा के साथ बिताना है,  आशा के दीपक को जलाकर,  अंधेरा दूर मिटाना है,  हर तरफ है भय का साम्राज्य,  उसको दूर भगाना है, आशा की किरण जलाना है,  हर चुनौती को लेकर चलना है,  परेशानी से ना घबराना है,  जीवन के हर संकट को  हराकर,  आशा का दीप जलाना है,  लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला कर,  घर-घर आशा का दीप जलाना है,  बस कुछ ऐसा कर जाना है,  लोगों को मुस्कान दे जाना है,  सबके जीवन में उजाला लाकर,  आशा  का दीप जलाना है। । गरिमा लखनवी

और अनुराग चला गया

  क्या हुआ जो उसके पैर में चोट लगी,  क्या हुआ जो उसको एडमिट नहीं किया,  वो लडता रहा जिन्दगी से जीने के लिए,  पर हार गया वह अपनी जिंदगी से, सबसे बडा दर्द यही है कि जिस अस्पताल में काम किया,  वही उसकी सुनवाई न हुई,  एक हसमुख इंसान हमारे बीच से चला गया,  दिल मे दर्द है आखे भी नम है,  अब कहाँ पायेंगे आपको, जहां रहिये खुश रहिये आप, यही प्रार्थनाकरते है हम सब,  बहुत याद आयेंगे आप। । गरिमा लखनवी

जय माता दी

 जय माता दी मां तुम आ जाओ फिर से इस धरती पर, बहुत अत्याचार हो रहा है इस धरती पर,  सब के दुख मिटा जाओ, रोग ताप  संताप मिटा जाओ, सब दुखियारे  हैं जन इस धरती पर,  अपनी महिमा का जलवा दिखा जाओ इस धरती पर, कन्याओं के साथ अत्याचार हो रहा, बहुओं को जला दिया जा रहा है, काली का रूप दिखा जाओ इस धरती पर, चंडी बन कर आ जाओ इस धरती पर, मां तुम आ जाओ फिर से इस धरती पर।। गरिमा लखनवी

पति को कैसे समझाए प्यार से तकरार से या अधिकार से

शादी के बाद हर लड़की यही चाहती है कि मेरा पति मुझसे प्यार करें, मेरी हर बात माने और किसी को चीट ना करें। हर पत्नी यह भी चाहती है कि मेरा पति मेरे साथ समय बताएं अगर वह ऐसा नहीं करता है तो पत्नी के दिल को बहुत ठेस पहुंचती है अंदर छोटी-छोटी बातों पर पति रूठ जाता है तो उसे कैसे मनाना चाहिए?   पत्नी की हर बात को समझना होगा और पति को भी यह समझना होगा कि हम दोनों साइकिल के दो पहिए हैं। पति को प्यार से समझाना चाहिए। पति अगर प्यार से ना समझे तब उसके साथ थोड़ी सी नोकझोंक करनी चाहिए। पति की हर जरूरत को समझना चाहिए।     पति की  हर इच्छा को पूर्ण करना चाहिए। पति को हर समय डांटने के लहजे में नहीं समझाना चाहिए पति को प्यार से समझाना चाहिए और अगर पति आपकी बातों को ना माने तो उसे अधिकार पूर्ण समझाना चाहिए। पति के परिवार को अपना परिवार समझना चाहिए और उनको पूर्ण सम्मान देना चाहिए परिवार के हर सदस्य की केयर करनी चाहिए जिसको देखते देख कर पतिदेव प्रसन्न हो जाते हैं। पति अगर टेंशन में हो तो उसकी बातों को सुनना चाहिए समझना चाहिए और उसे सही रास्ता दिखाना चाहिए। पति पत्नी का रिश्ता बहु...

डिपेरशन क्यों होता है

डिप्रेशन क्यों होता है? यह बहुत ही विचारणीय प्रश्न  है जब कोई दुखो में डूब जाता है, सारी  दुनिया उसे काली लगने लगती है, तब  व्यक्ति को कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। अवसाद का अर्थ मनोभावों से सम्बन्धी दुःख से होता है। अधिकतर यह देखा गया की जो प्रेम में ज्यादा डूबा है, और उसे उसका प्रेम नहीं मिला है, तो वह अवसाद में डूब जाता है। अवसाद की अवस्था में व्यक्ति स्वयं को लाचार समझता है, प्रेम ही नहीं वरन आज की परिस्थियों को देखते हुए बहुत सारे  कारण  अवसाद के होते है। अवसाद के कारण   नींद  नहीं आती है। विश्व सवास्थ्य संगठन के अनुसार अवसाद बहुत सामान्य बीमारी है। इस बीमारी का समय ६-८ महीने रहता है, अगर आपके किसी बहुत प्रिय की मृत्यु हो जाये और आप दुखी है, तो यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, और उसके दुःख में आप बहुत भावुक रहते है तो आप अवसाद का शिकार होते है। अगर आप जीवन में खालीपन महसूस कर रहे है तो अवसाद में है एक सर्वे के अनुसार महिलाओ को  जल्दी अक्साद होता है पुरुषो के अपेक्षा मानसिक रोग पागलपन नहीं है           जब कोई अवसाद ...

पेड़ और बारिश की व्यथा

पेड़ और बारिश का सम्बन्ध भी कैसा है, दोनों एक दुसरे के पूरक है, पेड़ो को काट रहे है बारिश  की मार झेल रहे है कौन बचाएगा पेड़ पोधो को जिनको मानव काट रहा है पक्षी घर कैसे बनायेंगे फिर पक्षी को कौन बचाएगा धरती पर पेड़ पौधे  न होंगे तो जीवन कैसे बचेगा पेडो   के काटने से खतरा बढ़ रहा है एक समय होगा न बारिश  होगी न पौधे होंगे कही गर्मी की मार पड रही है कही बरसात बहुत हो रही है बहुत मार झेल रही है प्रकृति पेड़ पौधे हमारी धरोहर है हरियाली मन को अच्छी लगती है अगर हम न सुधरे तो आने वाली पीढ़ी  हरियाली कैसे देखेंगी पेड़ न होगी तो सावन में गोरी झूले कैसे झुलेगी गरिमा