छोड़ दीजिए

 

ज़िंदगी में कोई काम ऐसा हो,

जो आपको अच्छा न लगे, उसे छोड़ दीजिए।

किसी का साथ दिल को रास न आए,

तो ऐसे रिश्ते को भी छोड़ दीजिए।

किसी चीज़ के पीछे यूँ मत भागिए,

जो वक्त पर मिलना हो, उसे वक्त पर छोड़ दीजिए।

कोई काम आपका बन नहीं रहा हो,

तो उसे भी किस्मत पर छोड़ दीजिए।

जो आपको मिलना होगा, मिलकर रहेगा,

इसलिए हर बात की फिक्र करना छोड़ दीजिए।

दूसरों की चिंता में अपनी ज़िंदगी न भूलिए,

अपने लिए भी थोड़ा जीना सीख लीजिए।

जो आपके साथ चले, उसका साथ निभाइए,

जो रास्ते में रुक जाए, उसे छोड़ दीजिए।

हर शिकायत का हिसाब रखना छोड़ दीजिए,

दिल में बोझ बनाकर कुछ भी मत रखिए।

सबके दुख को अपना समझना छोड़ दीजिए,

हर किसी का दर्द अपने दिल में न रखिए।

ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं,

जो बुरा है, उसे वहीं छोड़ दीजिए।

जिनसे भी मिलें, उनकी कमियाँ वहीं छोड़ आइए,

हर बात को दिल से लगाना छोड़ दीजिए।

ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है, इसे यूँ न गँवाइए,

जो सुकून छीन ले—उसे बस छोड़ दीजिए।

— गरिमा लखनवी

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