माँ ब्रह्मचारिणी की महिमा
माँ की महिमा निराली है,
तेरी शक्ति जग से न्यारी है।
तेरी महिमा वेदों ने गाई,
तेरे चरणों में दुनिया समाई।
तप और आचरण का पाठ पढ़ाती,
त्याग-तपस्या की मूरत कहलाती।
धैर्य और संयम का ज्ञान सिखाती,
भक्तों के जीवन में ज्योत जलाती।
जो भी तेरा दर्शन पाए,
तेरे चरणों में शीश नवाए।
ज्ञान और तप की तुम हो दाता,
भक्तों के कष्टों को हरने वाली माता।
तेरे दर्शन से शांति मिलती,
मन में श्रद्धा की ज्योति खिलती।
भवसागर से पार उतारो,
मैया! सब पर कृपा बरसाओ।
जय माँ ब्रह्मचारिणी!
— गरिमा लखनवी
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