लाल बहादुर शास्त्री
दो अक्टूबर उन्नीस सौ चार को,
मुगलसराय में जन्म हुआ।
माता रामदुलारी, पिता शारदा प्रसाद,
घर में खुशियों का आगमन हुआ।
काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि पाई,
स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका निभाई।
असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन में,
देश की आजादी की अलख जगाई।
नौ जून उन्नीस सौ चौंसठ को,
भारत के प्रधानमंत्री बने।
सादगी और ईमानदारी के प्रतीक,
जन-जन के दिलों में बसने लगे।
पैंसठ के भारत-पाक युद्ध में,
भारत ने विजय पताका फहराई।
“जय जवान, जय किसान” का नारा देकर,
देश में नई चेतना जगाई।
हरित क्रांति को बढ़ावा दिया,
श्वेत क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया।
देशहित में उपवास की पहल करके,
त्याग और समर्पण का संदेश दिया।
ग्यारह जनवरी उन्नीस सौ छियासठ को,
ताशकंद में उनका निधन हुआ।
उनके निधन से जुड़ी अनसुलझी चर्चाओं ने,
आज तक मन में प्रश्न खड़ा किया।
मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित,
ऐसे महापुरुष को मेरा शत-शत नमन।
देशभक्ति, सादगी और सत्य के प्रतीक,
शास्त्री जी को कोटि-कोटि वंदन।
— गरिमा लखनवी
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