"साहित्य साथी मेरा" दमयंती जोशी



मिला साथ दीदी का, लेखनी में आया निखार,

हर मोड़ पर दिया उन्होंने, स्नेह भरा उपहार।

राजश्री परिवार से जुड़कर, पाया सुंदर साथ,

दीदी के स्नेह-सानिध्य ने, रोशन की मेरी राह।

मेरी कविता की हर कमी को, दीदी ने पहचान,

प्रेरणा देकर हर पल मुझको, बढ़ाया मेरा मान।

दीदी मेरी प्यारी-दुलारी, बातें मन को भातीं,

उनकी मीठी सीख और बातें, नई दिशा दिखातीं।

हर रचना में उनका स्नेह, बनकर रहता आधार,

उनके आशीष से महकता, मेरा साहित्य संसार।

राजश्री परिवार यूँ ही, सदा बढ़ाता रहे सम्मान,

दीदी का आशीर्वाद मिले, यही है मेरी अरमान।

गरिमा लखनवी

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