संदेश

2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नया साल

  नया साल आने को है, पुराना साल जाने को है, कैसी विचित्र सी बात है— पुराने के जाने का ग़म मनाएँ या नए के आने की ख़ुशी में मुस्कराएँ। पुराने साल के जाने का दर्द है, क्योंकि उससे जुड़ी अनगिनत यादें हैं, कुछ हँसी, कुछ आँसू, कुछ अपने, कुछ छूटे हुए सपने हैं। नए साल की ख़ुशी इसलिए है, कि वह ढेरों खुशियाँ लाने वाला है, नई उम्मीदें, नए अरमान, जीवन को फिर से सजाने वाला है। आओ, नए साल का स्वागत करें, खुशियों की सौगात को अपनाएँ, पुराने का दुःख तो रहेगा ही, क्योंकि यही जीवन का नियम है— जो आता है, उसे एक दिन जाना होता है। गरिमा लखनवी 

हां, मैं औरत हूं

  हां, मैं औरत हूं, जो खुद के बारे में नहीं सोचती, हर किसी की ख्वाहिशें पूरी करना जिसका मकसद बन गया है। मां बनकर, बहन बनकर, बेटी बनकर, सबके हिस्से के फ़र्ज़ निभाती हूं, पर मेरी कौन सुनता है, ये सवाल अक्सर खामोश रह जाता है। दर्द मुझे भी होता है, पर इसकी परवाह कौन करता है? पूरे घर के लिए जीती हूं मैं, बीमार पड़ जाऊं तो भी मेरा हाल कोई नहीं समझता है। हां, मैं औरत हूं, ऑफिस जाकर काम करना मेरी मजबूरी है, घर संभालना मेरी जिम्मेदारी है, सबका ख्याल रखना मेरा कर्तव्य मान लिया गया है। पर मेरे बारे में कोई ना सोचे— ये सबकी आदत बन चुकी है। हां, मैं औरत हूं, दिन-रात की परवाह किए बिना सबको खुश करने में लगी रहती हूं, हर रिश्ता मुझे ही निभाना है, क्योंकि… मैं औरत हूं। गरिमा लखनवी 

अटल बिहारी बाजपेई जन्मदिवस

 अटल जी को शत्-शत् प्रणाम 25 दिसंबर 1924 को जन्मे, भारत के प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया, ओजस्वी कवि, प्रखर वक्ता, जिन्होंने शब्दों से भी राष्ट्र को शक्ति दी। देश–विदेश में भारत का मान बढ़ाया, भारत को परमाणु शक्ति राष्ट्र बनाया, भारत–पाक रिश्तों में संवाद की राह खोली, शांति का संदेश दुनिया तक पहुँचाया। अनेकों योजनाओं का किया शुभारंभ, मजबूत नींव पर खड़ा किया भारत का भविष्य, विकास, स्वाभिमान और सुशासन— आपकी पहचान बने जीवन भर। आज आपकी स्वर्ण शताब्दी मना रहा है देश, हर हृदय में गूंजती हैं आपकी कविताएँ, आओ, इस जन्मदिवस को बनाएं विशेष, याद करें उस युगपुरुष को श्रद्धा से। अटल जी, आपको मेरा शत्-शत् प्रणाम। 🙏 गरिमा लखनवी 

मदर टेरेसा

मदर टेरेसा— जिन्हें संत की उपाधि से नवाज़ा गया, 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे, उत्तरी मेसेडोनिया में इस धरती पर उनका अवतरण हुआ। अठारह वर्ष की अल्प आयु में घर–परिवार त्यागकर सेवा का संकल्प लिए वे भारत की धरती पर आईं। तीन सिद्धांतों पर टिकी थी उनकी दुनिया— अच्छे कर्म, जीवन के उच्च मूल्य और सामुदायिक भावना। सन् 1950 में कोलकाता में उन्होंने “मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी” की स्थापना की, जहाँ से करुणा, सेवा और प्रेम दुनिया भर में फैलने लगे। गरीबों, भूखों, बीमारों और बेसहारा लोगों की सेवा में उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित किया, इसी कारण वे विश्वभर में सम्मानित हुईं। मदर टेरेसा दुखियों के लिए आशा की किरण बनीं, और सन् 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया। सन् 1980 में भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। 5 सितंबर 1997 को वे इस नश्वर संसार से विदा हो गईं, पर उनकी करुणा, सेवा और मानवता आज भी जीवित है। ऐसी महान आत्मा को मेरा शत्-शत् नमन।  गरिमा लखनवी

नौसेना दिवस

 समंदर की लहरों का जो रखवाला है, वो भारत मां का शौर्य, उसका उजाला है। 5600 वर्षों का गौरवशाली इतिहास लिए, नौसेना ने देश का मान संभाला है। सभ्यता के प्रहरी, संस्कृति के रक्षक, हर तूफ़ान में डटे, सीमाओं के संरक्षक। नौसेना दिवस हमारे गर्व का सम्मान है, वीरों के साहस का अमर गान है। 1971 की विजय का स्वर्णिम अध्याय, जहाँ पर शौर्य ने दिखाया असली आकार। वह जीत आज भी राष्ट्र का शौर्यगान है, भारत का सीना गर्व से विस्तृत आसमान है। INS खुखरी का बलिदान नहीं भूलेगा देश, हर जलधारा में उसकी गूँज रहे विशेष। उसका साहस, उसकी जंग की दिलेरी, आज भी नौसैनिकों की प्रेरणा बनी खड़ी है। हमें अपनी नौसेना पर गर्व महान है, ये राष्ट्र का गौरव है, यही पहचान है। शत-शत नमन उन वीरों को, जो समंदर की लहरों पर लिखते विजय की दास्तान हैं।  गरिमा लखनवी

पाक सेना का आत्मसमर्पण

16 दिसंबर की सुबह गवाही देती है, जब दुश्मन के 93,000 सैनिक हथियार डालते हैं, वह दिन विजय दिवस बनकर हर भारतीय की धड़कन में बजता है। भारत माता के वीर सपूत, आज भी सीना ताने खड़े हैं— उनकी रगों में शौर्य बहता है, उनकी नज़रों में तिरंगा लहरता है। पर पाक अपने छल से नहीं सुधरता, वह भूल जाता है— कि भारत की शांति कमजोरी नहीं, बल्कि संयम की सीमा है। ऐ रणबांकुरो, उठो! माँ भारती ने हुंकार भरी है, बहुत सह लिया निर्दोषों का लहू, अब प्रतिकार की बारी है। कितने सपने अधूरे सो गए, माताओं की गोद उजड़ गई, बहनों की आँखें नम हो गईं, अब यह ऋण चुकाने की घड़ी है। शांति की भाषा जिसे सुनाई नहीं देती, दया का मोल जो समझता नहीं, उस पर दया कैसा? जिसने देश की गोद को श्मशान बनाया है। अब समय आया है— उसे उसकी हकीकत दिखाने का, क्योंकि इतिहास लिखता है, भारत सिर्फ लड़ता नहीं, भारत जीतता है… और विजय दिवस मनाता है ।। गरिमा लखनवी

क्या खोया, क्या पाया

जीवन की इस आपाधापी में, क्या खोया, क्या पाया हमने, आओ करें आकलन इसका, थोड़ा मन को टटोलें हमने। बचपन बीता खेलकूद में, हंसी-खुशी की छाँव में, वे सुनहरे दिन लौट न पाए, स्मृतियाँ रह गईं गाँव में। जवानी गई मौज-मस्ती में, सबकी इच्छा पूरी करते-करते, अपनी चाहत भूल ही बैठे, ख्वाहिशें दबा दीं मन के धरते। अब आया है बुढ़ापा यारों, सोचा भागवत भजन करेंगे, पर मोह-माया की डोरी में, फँसकर बस चिंतन ही करेंगे। क्या खोया और क्या पाया, सोचा तो बस इतना जाना— जीवन है पानी का बुलबुला, क्षण भर में मिट जाना। जिसने थामकर चलना सिखाया, उसी का हाथ छोड़ दिया, जीवन की तंग गलियों में आकर, अपनों का साथ खो दिया। जीवन की इस आपाधापी में, क्या पाया और क्या गंवाया हमने… गरिमा लखनवी

सच्चा सुख

  सुख क्या है, यह कोई नहीं जानता। किसी को धन में सुख दिखता है, किसी को घर-परिवार की खुशी, किसी को नौकरी में चैन मिलता है, पर सच्चा सुख क्या होता है, यह कोई नहीं जानता। सच्चा सुख तो मन की शांति है, जिसे पाने को सब दौड़ रहे हैं, पर संतोष का धन आज किसी के पास नहीं है। सच्चा सुख तब है, जब किसी चेहरे पर मुस्कान आ जाए, जब किसी को थोड़ी-सी मदद मिल जाए। सच्चा सुख तब है, जब किसी की ज़िंदगी संवर जाए, जब किसी का दर्द कम हो जाए। पर अफसोस— सच्चा सुख सब खोज रहे हैं, मगर यह नहीं समझते कि वह बाहर नहीं, हमारे भीतर ही छिपा है। — गरिमा लखनवी

राम जीवन

विष्णु के सप्तम अवतार, त्रेता युग में जन्मे राम, इक्ष्वाकु कुल की शोभा बढ़ाई, बन गए मर्यादा पुरुषोत्तम नाम। पिता के वचन की रक्षा की, चौदह वर्ष वनवास निभाया, धर्म-पालन के मार्ग पर चलकर, आदर्श मानव कहलाया। वनवास में ऋषि-मुनियों को, अधर्म से मुक्त कराया, रावण के अन्याय मिटाने, धनुष उठा संहार कराया। समुद्र पर सेतु बनाकर, लंका तक सेना को ले आए, अधर्म का अंत कर रावण से, सीता जी को वापस लाए। ग्यारह सहस्त्र वर्ष अयोध्या में, रामराज्य का राज बसाया, धर्म, न्याय और सत्य की छाया, हर प्रजा सुखी बनाया। लव-कुश को राज्य सौंपकर, बैकुंठ धाम को चले गए, सियाराम के नाम का जयघोष, युग-युगांतर तक गूँज गए। बोलो सियाराम चंद्र की जय  गरिमा पंत

गणपति जी

  प्रथम पूज्य गणपति तुम्हें वंदन हो हे गणपति इस वर्ष तुम जब आना,  अपने साथ रिद्धि सिद्धि लाना,  खुशियों के बादल बिखेर जाना, भाई भाई में प्यार जगा जाना, हर तरफ प्यार की बरसात कर जाना,  हे गणपति इस वर्ष तुम जब आना,  हर घर में सुख समृद्धि की बरसात कर जाना,  सभी के दिलों में प्यार की ज्योति जगा जाना,  बच्चों के दिलों में भक्ति की भावना जगा जाना, हे गणपति इस वर्ष तुम जब आना, मात पिता की सेवा करने का सभी में एहसास जगह जाना, महिलाओं में शक्ति का एहसास जगा जाना, भ्रष्टाचार खत्म हो यह एहसास जगह जाना, हे गणपति इस वर्ष तुम जब आना।। गरिमा लखनवी

सिजोफ्रेनिया

   सिजोफ्रेनिया  एक गंभीर मानसिक विकार है जो एक व्यक्ति की सोच, धारणाएं, भावनाओं और गंभीर व्यवहार में गड़बड़ी की विशेषता को चिन्हित करता है अर्थात व्यक्ति के मतिभ्रम , भ्रम और अव्यवस्थित सोच और व्यवहार का मिश्रण है। मतिग्रम मतिभ्रम में ऐसी चीजे देखना और आवाजे सुनना शामिल है जो इसरो द्वारा नही देखी जाती। भ्रम भ्रम में ऐसी चीजों के बारे में दृढ़ विश्वास शामिल होता है जो सच नहीं होती है शिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोग वास्तविकता से संपर्क हो सकते हैं जिससे दैनिक जीवन बहुत कठिन हो सकता है।   असंगत विचार विचारों को व्यवस्थित करने या तर्कसंगत तरीके से सोने में कठिनाई होना। भावनात्मक लक्षण यथा उदासी, उदासीनता और भावुकता रहेगा लोगों से दूर रहना और सामाजिक गतिविधियों से बचते हैं। इस बीमारी से पीड़ित लोगों के व्यवहार में बदलाव आ जाता है। सिजोफ्रेनिया किस कारण होता है क्या यह पता नहीं चल पाया परंतु शोधकर्ताओं का मानना है कि अनुवांशिकी मस्तिष्क रसायन और पर्यावरण का मिश्रण इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों का आमतौर पर 16 से 30 वर्ष की आयु के बीच विकृति क...

आंखें

तुम्हारी आंखें बहुत नशीली हैं, उसमें डूब जाने को मन करता है, तुम्हारी आंखों से संसार देखने का मन करता है, तुम्हारी आंखों में मैंने गहरा प्यार देखा है, तुम्हारी आंखों में मैंने अपने लिए चाहत देखी है, तुम्हारी आंखों में मैंने डर भी देखा है, अगर मैं न मिली तो क्या होगा, तुम्हारी आंखें आज नम क्यो हैं, तुम्हारी आंखें क्या क्या कह गई, तुम्हारी आंखों में मैंने सपने देखे है, तुम्हारी आंखें मुझे मदहोश बनाती है, तुम्हारी आंखें जीना सीखाती है, तुम्हारी आंखें जीवन के रहस्य बताती है, तुम्हारी आंखें ही मेरा जीवन है।। गरिमा लखनवी
 आप हमे क्या मिले जिंदगी बदल गई, आपका प्यार हमेशा बरसता रहा, एक दूसरे को समझ कर आगे बढ़ते रहे, आई बहुत बाधाएं आपका सहयोग मिलता रहा, आपके साथ हमेशा यूं ही बरसता रहे, हर मौसम आपका अहसास रहे, आपका साथ हो तो जिंदगी बहुत खूबसूरत है, आप से ही साज श्रृंगार हैं, हर दिन होली रात दिवाली हैं, हम तो आपकी परछाई हैं, आप जहां होंगे हम वहीं होंगे, हम दोनों का प्यार यूं ही महकता रहे, आप मेरी जिन्दगी की सुहानी किताब हैं, आप मेरे चांद में आपकी चांदनी हूं, जिंदगी में कभी साथ ना छोड़ना, हर पल हर घड़ी आपका प्यार हमेशा बरसता रहे।। वैवाहिक वर्षगांठ की बहुत-बहुत बधाई  गरिमा लखनवी

पर्यावरण दिवस

  आओ मिलकर पेड़ लगाए, इस धरती को स्वर्ग बनाए, होगी जब  चारों ओर हरियाली, तो धरती लगेगी प्यारी, पेड़ पौधे बहुत काम आते, पेड़ न हो तो बारिश ना हो, धरती पर त्राहि त्राहि मच जाए, पेड़ो पर पंछी की आवाज मन को लुभाती हैं, हे मनुष्य तुम क्यों पेड़ काट रहे हो, इस हरी भरी धरती को बाँझ क्यों बना रहे हो, आओ हम सब ये आज प्रण लें, हम सब पेड़ लगाएंगे, इस धरा को स्वर्ग बनाएंगे।। गरिमा लखनवी

योग दिवस

  21 जून को हम योग दिवस मनाते है, क्या एक दिन ही योग दिवस करना चाहिए, रोज योग करने से शरीर स्वस्थ रहता हैं, मन भी एकाग्र रहता हैं, प्रणायाम करने से हमको मिलता लाभ, योगा सेहत के लिए वरदान होता हैं, एक दिन योग करने से लाभ नहीं मिलता है, रोज रोज योग करने से डॉ के पास नहीं जाना होता है, योग के अभ्यास करने से कोई रोग नहीं होता हैं, शरीर लचीला फुर्तीला होता है, एक दिन योग न कर सारे साल योग करे, योग साधना से हमें जीवन को दिशा मिलती हैं, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बहुत बहुत बधाई।। गरिमा लखनवी

नर्स दिवस

  मैं एक नर्स हूँ, मैं दूसरे का जीवन बचाती हूं, सारे गम छुपाकर मैं मरीजो को हंसाती हूँ, बस यही मेरा काम है,  खुद से ज्यादा मरीजों की फ़िक्र करती हूँ, रात दिन की परवाह नहीं करती हूं, मां की तरह फ़र्ज़ निभाती हूँ, बीमारी में जब कोई साथ न देता, तो मे निस्वार्थ भाव से सेवा करती हूँ, मुझे लेडी विद द लैंप कहा जाता है, डॉक्टर अगर जरूरी है तो नर्स भी जरूरी हैं, ऑपरेशन के दौरान अगर नर्स न हो तो क्या ऑपरेशन पूरा हो जाएगा, नर्स का जीवन बहुत महान होता है, सभी नर्सों को मेरा प्रणाम है।। नर्स दिवस की बहुत बहुत बधाई  गरिमा लखनवी

दीवानी

  मैं तेरी दीवानी हूँ, हां मैं तेरी दीवानी हूँ , कभी खुद से कभी सबसे बेगानी हूँ । रोके कोई आज मुझे दिल लगाने से,  सांसे भी खत्म न ही ऐसी दीवानी हूँ।  रोक सके कोई मुझे तुमसे मिलने से, ऐसी किसी में हिम्मत नहीं मैं तेरी दीवानी हूं। लाख जमाना दुश्मन बने पाँव में जंजीर डाले , सारे जंजीरों को तोड‌कर तुझसे मिलने आईं हूँ। चाँद कहता है मुझसे तुम मदमस्त हो,  चाँद को क्या पता मैतेरी दीवानी हूँ।। गरिमा लखनवी

सिंदूर

   पहलगाम में निर्दोषों की जान ली, क्या सोचा कुछ होगा नही, भारत बदल रहा हैं, इसका पता पूरी दुनिया को पता चल गया, सोचा होगा कुछ न होगा, भारत डर जायेगा, सिंदूर का बदला ले लिया, बहुत सहा हमने अब न सहेंगे, दुश्मन के निशान मिटा देंगे, भारत जब शांत रहता है, तो प्यार बरसाता है, जब भारत के जवान के इशारा मिलता है, तब इतिहास रच देता हैं, जिन्होंने मासूम को दूसरी दुनिया पहुंचाया, जवानों ने उनके घर को जलाया, भारत ने नई शौर्य गाथा लिखी, सारे जवानों को मेरा मेरा शत शत नमन।। गरिमा लखनवी

शिव की महिमा

  शिव ही शक्ति शिव ही भक्ति,  शिव ही पूजा शिव ही सर्वस्व, शिव के सर पर गंगा सोहे,  शिव के माथे चंद्रमा विराजे, शरीर पर भस्म लपेटे,  ऐसे शिव की आज बारात निकली है,  मां पार्वती आस लगाए बैठी है, शिव आकर ले जाएंगे, मेरी सब कामना पूरी होगी, करेंगे हम सब मिलकर रुद्राभिषेक,  शिव मंत्रो का जाप करके, जीवन सरल बनाएंगे, शिवरात्रि के इस पावन पर्व पर, सबके जीवन में सुख आएगा, शिव की कृपा बनी रहे सब पर,  यही शुभकामना हम देते हैं ||  महाशिवरात्रि की सभी को बहुत-बहुत बधाई|  गरिमा लखनवी

बसंत पंचमी

  पीली चुनर ओढ़ कर आयी ज्ञान की देवी, सूरज ने आंखें खोली चारों ओर फिजा महक गयी,  मौसम ने करवट ली,  सरसों के खेतों में पीली परिधान  बिछ गयी, मां सरस्वती की कृपा से अज्ञानता का अंधेरा दूर हो, ज्ञान बुद्धि और विवेक का मिले ढेर सारा आशीर्वाद, कोयल की  कूक से,  बगिया में बहार आई,  बसंत पंचमी का यह त्यौहार,  सब बच्चों को होता प्यारा,  मां सरस्वती का आशीर्वाद मिले,  यही ध्येेय हमारा, मां तू ही इस चेतन मन में,  करती ऊर्जा का संचार,  तेरी कृपा बरसती रहे,  हम सबका हो उद्धार,  चहूॅ और पीली फिजा करती मन को मनमोहक है, मां सरस्वती का अभिनंदन करें,  उनके चरणों में बंदन करें,  मां के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम|| बसंत पंचमी के सभी को हार्दिक शुभकामनाएं गरिमा  लखनवी

प्यार

  प्यार एक एहसास है,  जो दो दिलों को पास लाता है, प्यार दीवानगी है,  जिसमें दो दिल डूब जाते हैं, प्यार एक पूजा है,  जो राधा कृष्ण की तरह किया जाता है, प्यार एक कशिश है,  जो दो दिलों को एक दूसरे के करीब लाती है,  प्यार एक बरसात है, जो दो दिलों के  अंतर मन को भिगो देती है, प्यार आसमान है,  जो दो दिलों को अपने आगोश में ले लेती है,  प्यार सागर है,  जिसमें दो दिल आकर मिल जाते हैं, प्यार एक फूल है,  जो दिलों में खुशबू फैलाता है, प्यार एक एहसास है, जो दो दिलों को पास लाता है|| गरिमा  लखनवी

धोखा

   आप तो ऐसे न थे,  मगर मेरी किस्मत मुझे कहाँ ले आई, इस दोराहे रास्ते पर मुझे,  मंजिल का पता भी नहीं,  मेरी मंजिल मुझे मिले  या ना मिले,  आपकी बातों पर यकीन करके,  मैंने धोखा खाया है,  अपने आप को पहचानने की हिम्मत, अब मुझमें नहीं बची,  आप ने ऐसा क्यों किया,  क्यों दिया धोखा मुझे?  कह देते में तुम्हारी मंजिल नहीं, तुम्हारी मंजिल कोई और है,  क्या बिगड जाता आपका,  मैं तो यकीन कर लेती,  आप मुझे धोखा न देगें,  पर अब क्या करूँ,  जिन्दगी से उब होने लगी,  समझ में नहीं आता किस पर यकीन करें,  आप से ऐसी उम्मीद तो ना थी,  मुझे क्या पता कि आप ऐसे मतलबी बन जायेंगे।। गरिमा Lucknavi