संदेश

गणतंत्र दिवस

 गणतंत्र दिवस की सुबह आई है, हर चेहरे पर खुशियाँ छाई हैं। अधिकार हमें इसी दिन मिले, जिनसे सपनों को उड़ान मिली है। नई उम्मीद, नया पैगाम लाया, आगे बढ़ने का पथ दिखाया। देश हमारा करे तरक्की, यही एहसास दिलाता है। संविधान का करें हम सम्मान, हर दिल में यही भावना जगाता है। हाथ थामकर एक-दूजे का, आगे कदम बढ़ाना है। वीरों के संघर्ष, उनके बलिदान, न कभी हम भूल पाएँगे। हँसी-खुशी और गर्व के संग, गणतंत्र दिवस मनाएँगे।

सुभाष को नमन

  मेरी लेखनी का आज उनको प्रणाम, देशप्रेम निभाया जिसने बिना थके, बिना विराम। आज मैं उनको हृदय से याद करती हूँ, जिन्हें सारा संसार सुभाष कहता है। देशभक्ति का वो अद्भुत मतवाला, मातृभूमि की रक्षा का सच्चा रखवाला। सूझबूझ और कूटनीति से क्रांति जलाई, युवाओं के मन में मशाल सदा जगाई। इतिहास नया रच डाला था उसने, अंग्रेजों की नींद उड़ा डाली थी। आजादी की मजबूत नींव रखकर, जन-जन में चेतना भर डाली थी। आज जंजीरें टूटी हैं पर खतरा बाकी है, अराजकता और आतंक अब भी साथी है। आओ सुभाष के पथ पर हम चलें, आजाद हिन्द की भावना फिर से बलें। हे सुभाष, जन्मदिवस पर नमन स्वीकारो, माँ भारती के दुख हरने फिर से पधारो।। गरिमा लखनवी

बसंत पंचमी

  पीली चुनर ओढ़े आई ज्ञान की देवी, सूरज ने आंखें खोली, फिज़ा महक उठी सेवी। मौसम ने ली है आज नई अंगड़ाई, सरसों के खेतों में पीली चादर छाई। मां सरस्वती की कृपा से मिटे अज्ञान अंधकार, ज्ञान, बुद्धि और विवेक का मिले अपार उपहार। कोयल की कूक से बगिया मुस्काई, बसंत पंचमी संग खुशियों की बहार आई। यह पर्व बच्चों को लगता सबसे प्यारा, मां सरस्वती से जुड़ा हर मन का सहारा। मां का आशीर्वाद मिले, यही ध्येय हमारा, ज्ञान-पथ पर बढ़े जीवन सारा। मां, तू ही चेतन मन में ऊर्जा भरती है, तेरी कृपा से हर सोच निखरती है। बरसती रहे सदा तेरी कृपा अपार, हम सबका हो जीवन उद्धार। चहुँ ओर पीली फिज़ा मन को भाए, मां सरस्वती का अभिनंदन गाए। उनके चरणों में वंदन करें, कोटि-कोटि प्रणाम अर्पण करें। बसंत पंचमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। — गरिमा लखनवी

स्वामी विवेकानंद

12 जनवरी 1863 को भारत ने एक दिव्य आत्मा को जन्म दिया, स्वामी विवेकानंद— महान संत, विचारक और युगद्रष्टा बने। रामकृष्ण परमहंस के शिष्य होकर उन्होंने वेदांत का आलोक फैलाया, रामकृष्ण मठ और मिशन की स्थापना कर मानवता को सेवा का पथ दिखाया। 1886 में संन्यास की दीक्षा ली, 1893 के शिकागो मंच से भारत की आध्यात्मिक चेतना को विश्व पटल पर अमर कर दिया। “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”— यह मंत्र देकर उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास जगाया। वेदांत और भारतीय संस्कृति के वे महान प्रवक्ता बने, उनका जन्मदिवस आज राष्ट्रीय युवा दिवस कहलाए। 4 जुलाई 1902 को केवल 39 वर्ष की आयु में उन्होंने देह त्यागी, पर विचार अमर हो गए। ऐसे देशभक्त संन्यासी को मेरा शत्-शत् नमन। 🙏 गरिमा लखनवी

नया साल

  नया साल आने को है, पुराना साल जाने को है, कैसी विचित्र सी बात है— पुराने के जाने का ग़म मनाएँ या नए के आने की ख़ुशी में मुस्कराएँ। पुराने साल के जाने का दर्द है, क्योंकि उससे जुड़ी अनगिनत यादें हैं, कुछ हँसी, कुछ आँसू, कुछ अपने, कुछ छूटे हुए सपने हैं। नए साल की ख़ुशी इसलिए है, कि वह ढेरों खुशियाँ लाने वाला है, नई उम्मीदें, नए अरमान, जीवन को फिर से सजाने वाला है। आओ, नए साल का स्वागत करें, खुशियों की सौगात को अपनाएँ, पुराने का दुःख तो रहेगा ही, क्योंकि यही जीवन का नियम है— जो आता है, उसे एक दिन जाना होता है। गरिमा लखनवी 

हां, मैं औरत हूं

  हां, मैं औरत हूं, जो खुद के बारे में नहीं सोचती, हर किसी की ख्वाहिशें पूरी करना जिसका मकसद बन गया है। मां बनकर, बहन बनकर, बेटी बनकर, सबके हिस्से के फ़र्ज़ निभाती हूं, पर मेरी कौन सुनता है, ये सवाल अक्सर खामोश रह जाता है। दर्द मुझे भी होता है, पर इसकी परवाह कौन करता है? पूरे घर के लिए जीती हूं मैं, बीमार पड़ जाऊं तो भी मेरा हाल कोई नहीं समझता है। हां, मैं औरत हूं, ऑफिस जाकर काम करना मेरी मजबूरी है, घर संभालना मेरी जिम्मेदारी है, सबका ख्याल रखना मेरा कर्तव्य मान लिया गया है। पर मेरे बारे में कोई ना सोचे— ये सबकी आदत बन चुकी है। हां, मैं औरत हूं, दिन-रात की परवाह किए बिना सबको खुश करने में लगी रहती हूं, हर रिश्ता मुझे ही निभाना है, क्योंकि… मैं औरत हूं। गरिमा लखनवी 

अटल बिहारी बाजपेई जन्मदिवस

 अटल जी को शत्-शत् प्रणाम 25 दिसंबर 1924 को जन्मे, भारत के प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया, ओजस्वी कवि, प्रखर वक्ता, जिन्होंने शब्दों से भी राष्ट्र को शक्ति दी। देश–विदेश में भारत का मान बढ़ाया, भारत को परमाणु शक्ति राष्ट्र बनाया, भारत–पाक रिश्तों में संवाद की राह खोली, शांति का संदेश दुनिया तक पहुँचाया। अनेकों योजनाओं का किया शुभारंभ, मजबूत नींव पर खड़ा किया भारत का भविष्य, विकास, स्वाभिमान और सुशासन— आपकी पहचान बने जीवन भर। आज आपकी स्वर्ण शताब्दी मना रहा है देश, हर हृदय में गूंजती हैं आपकी कविताएँ, आओ, इस जन्मदिवस को बनाएं विशेष, याद करें उस युगपुरुष को श्रद्धा से। अटल जी, आपको मेरा शत्-शत् प्रणाम। 🙏 गरिमा लखनवी