बसंत पंचमी
पीली चुनर ओढ़े आई ज्ञान की देवी,
सूरज ने आंखें खोली, फिज़ा महक उठी सेवी।
मौसम ने ली है आज नई अंगड़ाई,
सरसों के खेतों में पीली चादर छाई।
मां सरस्वती की कृपा से मिटे अज्ञान अंधकार,
ज्ञान, बुद्धि और विवेक का मिले अपार उपहार।
कोयल की कूक से बगिया मुस्काई,
बसंत पंचमी संग खुशियों की बहार आई।
यह पर्व बच्चों को लगता सबसे प्यारा,
मां सरस्वती से जुड़ा हर मन का सहारा।
मां का आशीर्वाद मिले, यही ध्येय हमारा,
ज्ञान-पथ पर बढ़े जीवन सारा।
मां, तू ही चेतन मन में ऊर्जा भरती है,
तेरी कृपा से हर सोच निखरती है।
बरसती रहे सदा तेरी कृपा अपार,
हम सबका हो जीवन उद्धार।
चहुँ ओर पीली फिज़ा मन को भाए,
मां सरस्वती का अभिनंदन गाए।
उनके चरणों में वंदन करें,
कोटि-कोटि प्रणाम अर्पण करें।
बसंत पंचमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
— गरिमा लखनवी
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