सुभाष को नमन
मेरी लेखनी का आज उनको प्रणाम,
देशप्रेम निभाया जिसने बिना थके, बिना विराम।
आज मैं उनको हृदय से याद करती हूँ,
जिन्हें सारा संसार सुभाष कहता है।
देशभक्ति का वो अद्भुत मतवाला,
मातृभूमि की रक्षा का सच्चा रखवाला।
सूझबूझ और कूटनीति से क्रांति जलाई,
युवाओं के मन में मशाल सदा जगाई।
इतिहास नया रच डाला था उसने,
अंग्रेजों की नींद उड़ा डाली थी।
आजादी की मजबूत नींव रखकर,
जन-जन में चेतना भर डाली थी।
आज जंजीरें टूटी हैं पर खतरा बाकी है,
अराजकता और आतंक अब भी साथी है।
आओ सुभाष के पथ पर हम चलें,
आजाद हिन्द की भावना फिर से बलें।
हे सुभाष, जन्मदिवस पर नमन स्वीकारो,
माँ भारती के दुख हरने फिर से पधारो।।
गरिमा लखनवी
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