स्वामी विवेकानंद


12 जनवरी 1863 को भारत ने

एक दिव्य आत्मा को जन्म दिया,

स्वामी विवेकानंद—

महान संत, विचारक और युगद्रष्टा बने।

रामकृष्ण परमहंस के शिष्य होकर

उन्होंने वेदांत का आलोक फैलाया,

रामकृष्ण मठ और मिशन की स्थापना कर

मानवता को सेवा का पथ दिखाया।

1886 में संन्यास की दीक्षा ली,

1893 के शिकागो मंच से

भारत की आध्यात्मिक चेतना को

विश्व पटल पर अमर कर दिया।

“उठो, जागो और तब तक मत रुको

जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”—

यह मंत्र देकर उन्होंने

युवाओं में आत्मविश्वास जगाया।

वेदांत और भारतीय संस्कृति के

वे महान प्रवक्ता बने,

उनका जन्मदिवस आज

राष्ट्रीय युवा दिवस कहलाए।

4 जुलाई 1902 को

केवल 39 वर्ष की आयु में

उन्होंने देह त्यागी,

पर विचार अमर हो गए।

ऐसे देशभक्त संन्यासी को

मेरा शत्-शत् नमन। 🙏

गरिमा लखनवी

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गणपति जी

मुझे जाने दो