ऐसा देश नहीं चाहिए
भ्रष्टाचार हो इस देश में, ऐसा देश नहीं चाहिए,
नारी की हो जहाँ बेइज्जती, ऐसा देश नहीं चाहिए।
बड़े-बुजुर्गों का जहाँ मान-सम्मान न हो,
छोटों के प्रति जहाँ प्यार न हो, ऐसा देश नहीं चाहिए।
जहाँ धन-दौलत की ही पूजा हो,
इंसानियत की कोई कदर न हो, ऐसा देश नहीं चाहिए।
जहाँ धर्म के नाम पर आपस में विवाद हो,
भाई-भाई का जहाँ दुश्मन हो, ऐसा देश नहीं चाहिए।
जहाँ रिश्तों में हर पल तकरार हो,
सास-बहू में भी प्रेम न हो, ऐसा देश नहीं चाहिए।
जहाँ गरीबों के हक पर कोई डाका डाले,
और स्वार्थ में अपने ही घर भर डाले, ऐसा देश नहीं चाहिए।
जहाँ अमीरी-गरीबी में भेदभाव की दीवार हो,
हर इंसान के बीच समानता और अधिकार हो।
जहाँ प्रेम, भाईचारा और सद्भावना का वास हो,
हर चेहरे पर मुस्कान और दिल में विश्वास हो।
जहाँ अमन-चैन, सुख-शांति का बसेरा हो,
हर नागरिक के जीवन में उजियारा हो।
ऐसा देश नहीं, ऐसा भारत चाहिए,
जहाँ हर दिल में प्रेम और हर मन में सम्मान चाहिए।
— गरिमा लखनवी
टिप्पणियाँ