संदेश

कल किसने देखा है

  क्या कल कभी आता है सब लोग काम कल पर देते है छोड़ क्या होता है कल किसी ने न देखा किसी ने न जाना आज में जीना होता है कल का कोई काम पूरा नहीं होता जो लोग जीते है आज में वाही होते है सफल कल जिन्दगी रहे न रहे तो सारे काम कर लो आज ही कल क्या ठिकाना कोई गिला न रहे हमें की शायद ये काम आज ही कर लिया होता पूरा तो आज पछताना नहीं पड़ता क्योकि कल कभी नहीं आता तो क्यों जीते है कल में आज ही कर लो हर तमन्ना पूरी क्या पता कल हो न हो

प्लेटलेट्स दान महान

  नया ज़माना नये अनुसंधान, आओ अब मिल करें प्लेटलेट्स का दान,  आता यह गंभीर रोग में काम,  जीवन बचाएं हम भी निष्काम, निर्भयता से करो प्लेटलेट दान, यह आता डेंगू और कैंसर से लड़ने के काम, ना आती कोई कमजोरी  72 घंटे बाद कर सकते दुबारा प्लेटलेट दान  बीमारियों का बढ़ता प्रकोप, आओ मिल करें प्लेटलेट दान  मनुष्य बढ़ा सकता जीवन का मान  प्लेटलेट्स दान कर पुण्य कमाए, अनजानों को दें मुस्कान,  प्लेटलेट्स दान करना बहुत आसान, इससे ना हो कोई नुकसान, प्रदेश में ऐसा न कोई अभियान,  लोहिया संस्थान चला रहा यह अभियान, प्लेटलेटस दान महादान महाभियान, आओ हम सब लें आज संकल्प, जिन्दगी को बचाने हम आगे आएंगे, प्लेटलेट्स दान करके हम जीवन बचाएंगे।। गरिमा लखनवी

पंडित दीनदयाल उपाध्याय

  1916 में जन्म लिया,  देश प्रेम का भाव लिए,  जन-जन में मानवतावाद भरने वाले,  ऐसे महापुरुष दीनदयाल उपाध्याय कहलाते हैं। सादा जीवन उच्च विचार,  यही रहा उनका व्यवहार,  सवके दुख को हरने वाले, 2 धोती दो कुर्ते में,  अपना जीवन बिता दिया, उनके जैसा कोई नहीं,  उन्होंने बता दिया,  देश प्रेम की लॉ जलाकर,  सबको पाठ पढ़ाया था, मां पिता का गौरव बढ़ाया,  देश को एक नई दिशा दिलाई,  ऐसे कर्म वीरों को,  मेरा शत-शत प्रणाम।। गरिमा लखनऊ

आजाद जी कहानी

  आजाद जन्मे भारत में,  देशभक्ति का जज्बा लिये, देश को आजाद कराने में,  अपना सर्वस्य न्यौछावर किया,  परतंत्रता भी काली रातों में,  आजादी का सूरज लाया था,  तोपे भी उसके सामने नतमस्तक थी, ऐसा वो शूरवीर मानव था ,  गोरो का सपना ऐसा था,  आजाद को बंदी बनाने का, जिंदा तो पकड़ ना पाते गोरे,  अगर वह छला गया न होता,  गोरो को जिंदा वो ना मिला,  अपने हाथों अपनी जान दे दी,  ऐसे शूररवीर महापुरुषों को, मेरा कोटि-कोटि प्रणाम।।  गरिमा लखनवी

प्यार

   प्यार से प्यारा अहसास कुछ नही है, तुमसे प्यारा इस जहा मे कोई नही है, हर पल तेरी याद मुझको तडपाती है, हर वक्त तेरी बाते मुझको रुलाती है, तुमसे दूर रहना बहुत मुश्किल है, तुमसे बाते करना बहुत अच्छा लगता है, कुछ ख्वाब अधूरे से लगते है, उन ख्वाबो को तुम्हारे साथ पूरा करना है, रात की चांदनी बहुत खूबसूरत है, उसकी शीतलता तुम्हारी याद दिलाती है, प्यार बहुत खूबसूरत अहसास है, उन प्यारी यादो का अहसास अभी जिन्दा है, प्यार से प्यारा अहसास कुछ नही है।। गरिमा लखनवी

अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि

   1929 में जन्मी, मां सरस्वती का वास जिनके गले में था,  अपने गीतों की धूम मचा कर  देश विदेशों में नाम कमाया अपने गीतों से आपने,  अपने सबके दिल को बहलाया,  गम होगा तो मेरे दिल में,  आप के गाने सुन लेते थे, स्वर कोकिला का खिताब पाया,  सब के दिलों पर राज करती,  सब आपको बहुत प्यार करते हैं,  आज सबकी आंखें नम है,  आप हमको छोड़ गई,  दीदी आपका यू जाना,  हम सबको रुला गया,  यही दुआ हम करते हैं,  आपको भगवान के चरणों में जगह मिले,  भगवान भी आप के गानों का रसास्वादन अब करें,  आपकी चरणों में शत शत नमन।।  अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि
 मेरी लेखनी का आज उनको एक प्रणाम,  देश प्रेम किया जिन्होंने बिना थके बिना विराम,  आज मैं उनको याद हूं करती,  जिन्हें दुनिया सुभाष है कहती,  देशभक्ति का वो मतवाला, मातृभूमि की रक्षा करने वाला,  अपनी सूझबूझ और कूटनीति से,  जिसने क्रांति की मशाल जलाई,  बलिदानी सिरफिरे युवाओं में, फिर यह मशाल बुझने ना पाई,  इतिहास नया रच डाला था, अंग्रेजों की नींद उड़ा दी थी,  उसने ऐसा जोश भर डाला था, जिसने आजादी की नींव डाल दी थी आज मेरी कलम यह कहती,  आजादी के उन परवानों से,  गुलामी की जंजीर तो टूट चुकी,  पर खतरा है उन नाफरमानों से, फैला रहे जो अराजकता,  आतंकवाद का थामा है दामन जिननें,  देश का सौदा करने को,  मचल रहा है मन जिनका, आओ आज सुभाष के सपनों पर,  उनके सुझाए पथ पर चलकर,   आजाद हिन्द फौज का फिर से निर्माण करें,  देश में फैले अराजक तत्वों को , हम सब मिलकर दमन करें,  मां भारती कर रही करुण क्रंदन,  हे सुभाष आ जाओ अब धरती पर फिर से,  त्रास हरो फिर से जन मन के,   फिर से सब में जोश व...