पितरों को नमन

 

पितर हमारे पूजनीय होते हैं,

हम श्रद्धा से उनकी वंदना करते हैं।

वर्ष में एक समय आता है,

जब पितरों को याद किया जाता है।

पर मन में एक प्रश्न उठता है,

जीते जी जिसका सम्मान न कर सके,

जिसे अपना प्यार न दे सके,

मरने के बाद प्रेम जताने से क्या होगा?

पितरों को देवतुल्य माना जाता है,

उनका आशीष जीवन संवारता है।

मान्यता है, आत्मा नया रूप धारण करती है,

फिर भी उनकी स्मृतियाँ हमारे साथ रहती हैं।

पितर ही हमारे जीवन का आधार हैं,

उनके बिना घर सूना-सूना सा लगता है।

पितरों के पुण्य प्रताप से कीर्ति मिलती है,

उनके आशीष से सुख-समृद्धि मिलती है।

आओ, जीते जी अपनों का सम्मान करें,

प्रेम और स्नेह से उनका सत्कार करें।

पितरों की स्मृति को हृदय में सदा बसाएँ,

उनके संस्कारों को जीवन में अपनाएँ।

सभी पितरों को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम,

श्रद्धा-सुमन अर्पित कर शत-शत नमन।

गरिमा लखनवी

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