संदेश

करवाचौथ

   चाँद तुमको मेरी कसम, तुम जल्दी से आ जाना , में दिन भर अपने पति की लंबी उम्र के लिए, भूखी प्यासी रहती हूं,  तुम जिस पल खुश होते हो,  में सोलह शृंगार कर प्रिये,  तुमको में रिझाती हूं,  हर पल साथ तुम्हारा हो,  यही प्रार्थना करती हूं,  हर जन्म हो साथ तेरा,  चाँद में तेरा दीदार करने को, सुबह से इंतजार करती हूं,  ए चांद तुम जल्दी से आना,  मैं चलनी से सजना का दीदार करू, मेरा संसार तुम से है,  पूजा की थाल सजाकर में,  बैठी हूं हाथों में मेहंदी लगाकर, कर रही हूं चांद तेरा इंतजार,  आ जाओ जल्दी से तुम ।। गरिमा Lucknavi

जीवन का सच

  जीते जी किसी का सम्मान ना कर पाए,  तो मरने के बाद उसका गुणगान क्यों करते हैं,  जीवन छड़भंगुर है यह कोई समझ ना पाया,  क्या खोया क्या पाया इसी का आकलन करते रहे,  जीवन सुख दुःख का मिश्रण है,  जीवन परिवर्तन का नियम है,  जीवन को संवारना है,  जीवन को निखारना है,  जीवन फूल की तरह है,  पहले कल फिर फूल फिर मुरझा जाता है,  जीवन रंग मंच का मेला है,  सब आते है अपना किरदार निभाने,  लोग क्यों किसी की भावनाओं से हरदम खेलते हैं,  क्या सोचते हैं की दूसरे के दिल पर कुछ असर ना होगा,  वो पागल है जो दूसरों के लिए अपना समय बर्बाद करते हैं,  हम तो यारों, यारो की मस्ती में मस्त रहते हैं। । गरिमा

दीदार

 मुद्दतों से बड़ी तमन्ना थी मुझे तुमसे मिलने की, पर दिख ना रहा था रास्ता मुझे कोई मेरी ज़िन्दगी में, लेकिन गये क्या हम उनके दर पर, खुलते ही दरवाजा के हो गए दीदार उनके, दीदार होते ही नज़रे चार हुई,  आँखों ही आँखों में बात हुई, कुछ शिकवे तुम्हारे थे,  कुछ शिकवे हमारे थे,  क्यों चले गए थे जीवन से,  ऐसा लगता था मानो जिंदगी वीरान हो गई हो,  सारे जहाँ की खुशियां तुम अपने साथ ले गए हों,  ऐसे मिले हम तुमसे,  जैसे जन्मों से बिछड़े हुए हो,  आकर मिले गले एक दूजे से,  सारे गिले शिकवे आसुओं में बह गए।। गरिमा Lucknavi

वृद्धावस्था

 जीवन की आपाधापी में, क्या खोया क्या पाया हमने,  आज चलो विचार करे मिल,  कितने पल हमने साथ बिताएं, तुम बच्चों के साथ व्यस्त रही,  हम उनके लालन पालन में,  कोई सुकून ना पाया हमने,  आज वहीं बच्चे हमे ना पूछते,  जीवन की सारी उम्र हम दोनों ने , उनके लिए समर्पण कर दी,  अब हमदोनों एक साथ  बैठ,  अपनी यादे ताजातरीन कर ले, जो कुछ जवानी में हमने खोया,  आज बुढ़ापे में हम हर हसरत पूरी कर ले,  हम उस दहलीज पर खड़े हुए हैं, कब कौन बिछुड़ जाए पता नहीं,  ए मेरे जीवनसाथी यू ही तुम,  सदा सदा साथ निभाना। । Garima Lucknavi

दर्द

 तेरे दर्द से अंजान नहीं हूं मै, अपने आसुओं को रोककर रखना,  दुनिया उन आसुओं का मज़ाक ना बना दे,  ईश्वर पर सदेव विश्वास रखना,  दुःख के काले बादल भी छट जाएंगे,  सूरज की रोशनी तुम्हारे जीवन में उजाला लाएगी,  चेहरे पर मुस्कान बनाए रखना,  आशा की अलख जलाये रखना,  हर कदम पर होगी जय कार तुम्हारी, अपने दर्द को  दिल में छुपा कर रखना,  दुख के बादल छट जाएंगे,  अपना विश्वास बनाए रखना, प्यार का अलख जलाये रखना,  हम साथ है तेरे हम कदम पर,  य़ह विश्वास बनाए रखना।। गरिमा लखनऊ

तेरी बातें

   तेरी बातें मुझको लुभाती है,  जीने का अंदाज सिखाती हैं,  अगर कोई परेशानी जीवन में आ जाए,  सही राह हमको दिखाती हैं,  तेरी यादे मुझको तड़पाती है,  सावन में आग लगाती है,  तेरी मुस्कराहट मेरे सारे ग़म भुलाते है, तेरी आँखों में मैने प्यार के समुंदर देखे हैं,  उन समुंदर में डूब जाना चाहती हूं,  तेरे लिए मेरी चाहत कभी कम नहीं होगी,  उन चाहतों में डूब जाना चाहती हूं,  तेरी बातें मुझको वो सब याद दिलाती है,  जिन को याद कर उन्हें दोहराना चाहती हूं,  चाँद को देखकर मुझे तुम याद आती हो,  उस चांदनी में मै डूब जाना चाहती हूं,  तेरी बातें मुझको लुभाती है  जीवन के कई रंग याद दिलाती हैं, गरिमा Lucknavi

करगिल दिवस

  26 जुलाई को हम करगिल दिवस मनाते हैं, आओ हम सब मिलकर उन वीर जवानों को याद करे, जिन्होंने करगिल की चोटी पर झंडा फहराया था,  क्या कहें उन बहनो को, जिनकी राखी खाक हो गयी,  उन माँ की क्या व्यथा कहूँ, जिनकी गोद सूनी हो गयी , क्या कहूँ उन दुल्हन को, जिनकी सेज युद्ध भूमि हो गई,  अगर जवान ना सीमा पर डटे रहे,  तभी चैन से हम सोते हैं,  जाड़ा गर्मी हो या बरसात,  सीना ताने खड़े रहते हैं,  बर्फ हो या रेगिस्तान,  दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए,  नमन है उन वीर जवानों को,  जिनके हाथों में हम सुरक्षित है,  मेरा शत शत प्रणाम है जवानों को ।। गरिमा लखनवी