संदेश

मेरी आदत

आपको याद करना मेरी आदत बन गई है, आपसे बातें करना मेरी आदत बन गई है। आपको दिन रात चाहना मेरी आदत बन गई है, आपसे डांट खाना मेरी आदत बन गई है। आपसे मिलना मेरी चाहत बन गई है, आपके आगोश में डूब जाना मेरी आदत बन गई है। आपकी परछाई से भी प्यार करना मेरी आदत बन गई है, आपके साथ बरसात की बूंदों में भीग जाना मेरी आदत बन गई है, आपके प्यार में डूब जाना मेरी आदत बन गई है।। गरिमा लखनवी

प्रकृति

 प्रकृति कुछ कहना चाहती है मुझसे, हवा की सरसराहट, पक्षियों की चहचहाहट, नदियों का शोर, बारिश का उल्लास वातावरण, मेरे मन को प्रफुल्लित कर्ता है, ऐसा लगता है मानो प्रकृति कुछ कहना चाहती हो मुझसे, बारिश की बंद से बातें करने का मन कर्ता है , चांदनी रात का मदमस्त वातावरण, मुझसे बातें कर्ता है, चांदनी की शीतलता मुझे सुकून देती हैं, सूरज का ताप हमेशा हौसला देता है, प्रकृति ने बहुत कुछ सिखाया है हमको, नदियों ने शांत रहना सिखाया है हमको, हवा ने मधुरता सिखाया है हमको, तूफानों ने लादना सिखाया है हमको, प्रकृति बहुत कुछ सिखाती है हमको, प्रकृति और जीवन में बहुत समानता है, प्रकृति हमे लड़ना सिखाती हैं, प्रकृति जीवन हमे जीना सिखाती हैं। । गरिमा Lucknavi 

आया बसंत

     हर तरफ छाया है बसंत की खुमार, चारों ओर फैला है खुशियों का वातावरण,  जाड़े से गर्मी की और प्रकृति जा रही हैं, हर तरफ सरसों का पीला वातावरण है, मानो धरती माँ ने धानी चुनर ओढ़ रखी है, बागों में चिड़िया चहक रही हैं, आम की बोर की खुशबु चारो ओर बिखरी है,  कलियों  ने भी आखे खोली , नई उमंग के साथ प्रकृति इठलाते, सूरज ने भी गर्मी दे दी , हर जगह लाल पीले फूलो की चादर  बिछी हुई  लगती है , मौसम भी मजे ले रहा है,  हर तरफ उजाला हो रहा है,  बसंत के मौसम में हर कोई,  प्रक्रति में खो जाना चाहता है,    हर कोई उल्लासित है,  बसंत के मौसम में , चारो ओर धुन्ध हट रही हैं, वैसे ही सबके दिलों से , नफरत की धुन्ध हट जाए, सबके दिलों में प्यार की बरसात हो, बसंत आया मदमस्त समा लाया। । गरिमा लखनवी

गणतंत्र दिवस

   गणतंत्र दिवस आ गया, हर्षोल्लास हो गया,  चारों और धूम मची, हर गली में नारा गूंज गया।pp  प्रभात फेरी का दौर चला, हर भारतीय में जोश बढ़ा, भारतीय संस्कृति की चुनर ओढ़, चल पड़े सब नर नारी,  तिरंगे की धूम मची, भारत माता की जय के नारे गूंजे,  गणतंत्र दिवस आ गया हर्षोल्लास छा गया। नवपरिधान बसंती रंग का, भारत माता आयी हैं, रंग-बिरंगे फूलों से, मां का आंचल सजाया है। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सबने शान बढ़ाया है, वीरों ने इसकी रक्षा में अपना रक्त बहाया है, आओ मिलकर हम तिरंगा फहरायें झूमें नाचें गाएं बजाएं, गणतंत्र दिवस आ गया हर्षोल्लास छा गया।। गरिमा लखनवी

मकर संक्रांति पर पतंग की बातें

  आओ ऐसी पतंग बनाए, जिसको चारों और लहराए, विश्व शांति का पाठ पढ़ाई , प्यार  का संदेश फैलाये, तिल के लड्डू सबमें बातें, खिचड़ी सबके साथ मिलकर खाए, आओ ऐसी पतंग बनाए, पतंग जो उड़े आसमान में , सुख शांति का संदेश बिखरे, हर ओर बिखरी सुगंध हो, तिल गुड़ का मेल हो, मकर संक्रांति के दिन, सूरज मामा आखें खोलते हैं, हर कली मुस्कुराती है, आओ एक ऐसी पतंग बनाए, जिसकी डोर इंसानो को बांधे, हर रिश्ते को मजबूत बनाए, परिवार को समझे जाने, हर बंधन को बांध कर रखे, आओ एक ऐसी पतंग बनाए। । मकर संक्रांति की शुभकामनाएं  गरिमा Lucknavi

महानमा मालवीय

 25 दिसंबर 1861 मे जन्मे,  बहुत सरल व्यक्तित्व था उनका, विनम्र एवं शालीनता भरी, प्रेमभाव हमेशा रहता, हर किसी के साथ मित्रवत व्यवहार रहता, वकालत मे उन्हे कोई हरा न सका, अंगेज भी दातो तले अंगुली दबाती,  गौ गंगा गायत्री उनके प्राण थे, गंगा माॅ के लिए बहुत कार्य किए,  काशी हिन्द विश्वविद्यालय का निर्माण कराया, कितने बच्चो का जीवन संवार दिया, हिन्दी की अखण्ड ज्योति जलाई,  सरकार ने उनकी काबलियत को समझा, भारत रत्न से नवाज दिया, प्रथम पुरुष थे वो ऐसे, जिसको महामना की उपाधि से नवाज दिया, उनके जन्म दिवस पर,  उनको शत-शत प्रणाम। । गरिमा लखनवी

परिवर्तन

  परिवर्तन आएगा ऐसा सभी कहते हैं, विचारों में परिवर्तन आएगा, स्वच्छता पर लोग काम करेंगे, जो कड़ियां टूट गई है उनको जोड़ा जाएगा, नेता अच्छा काम करेंगे, भ्रष्टाचार का खात्मा होगा, विचारों में समानता होगी,, हां वह कहते हैं परिवर्तन आएगा। काम बिना लिए दिए होंगे, स्पष्ट बातें सब लोग करेंगे, मिलावट का दौर खत्म करेंगे, हां वह कहते हैं परिवर्तन आएगा। देश में हरियाली होगी, सुखा काल से मुक्ति होगी, लोगों के चेहरे पर खुशी होगी, हां वह कहते हैं परिवर्तन आएगा। भारतीय संस्कृति को लोग अपनाएंगे, बच्चों को संस्कृति बताएंगे, माता-पिता की इज्जत करेंगे सब, बड़ों के सम्मान में छोटों को प्यार करेंगे, हां वह कहते हैं परिवर्तन आएगा। पर कब आएगा यह कोई नहीं बताता।। गरिमा लखनऊ