संदेश

पानी

पानी क्या है? जल की धारा जिसमे  में  मिल  जाये हो जाये  उसकी  तरह, तो क्यों हम नहीं  हो पाते पानी की तरह  निर्मल, पानी है जीवन ये न हो तो जीवन है बेकार  फिर भी हम नहीं समझ पाते इसका मोल, आदमी का जीवन पानी  की तरह हो निर्मल  तो कितना अच्छा हो पर हम लड़ते रहते  है, ये जीवन मिला एक बार तो क्यों हम व्यर्थ  गवाते है? पानी की  तरह  हमें निर्मल होना  होगा तभी  ये जिन्दगी होगी सार्थक गरिमा  

दिवाली

दिवाली है रौशनी का त्यौहार खुशियों  की है बहार,   हर कोई है रौशनी में नहाया हुआ काली  रात में जगमग होती सारी दुनिया फिर भी कही है खाली पन क्या है वो कुछ लोगो की गरीबी कहती  है  हमारी तो क्या दिवाली क्या होली हमरे लिए तो सब दिन होते एक बराबर क्या होली क्या दिवाली कैसी बिडम्बना है कुछ लोग तो बढ़िया दिवाली है मनाते और कुछ लोग रौशनी देखकर  खुश हो जाते जाते है

धूल

धूल   क्या है, एक  छोटा सा कड पर आख में पड़  जाये तो आख खराब हो जाती है क्यों  कोई उसे  कम जानता है,  जिस तरह एक छोटा सा कड़ कही चला जाये तो उस हिस्से में दर्द होता है वैसे ही अगर  राजा हो  या  रंक सब एक बराबर है कोई   न बड़ा न कोई छोटा किसी को दर्द दो तो दर्द  देता है धूल हमें सीखता है की छोटा आदमी भी उतना ही खास होता है  भी कुछ गुर होते है तो अभिमान नहीं करना  चहिए, जब आंधी  आती है तो सब खत्म हो जाता है

विश्वास

मन में है विश्वास   लड़ जायेंगे तूफानों से,  इस  वीरान पड़ी जिन्दगी में कुछ पल गुदगुदाएँगे, हम वो है जो लहरों से भी नहीं है घबराते, ये विश्वास है की हम न हारेंगे कभी न थकेंगे न रुकेंगे आगे बढ़ते जायेंगे है मन में यह विश्वास रोक  न पाया कोई हमको चाहे  आये कोई तूफ़ान , तूफानों में लो जलाना है हमारा ही काम है मन में यह विश्वास

गरीबी

गरीबी क्या  है? कुछ भी तो नहीं जो लोग जो गरीबी  की रेखा के नीचे है, वो भारत शब्द का इस्तेमाल करता है और जो बुदीजीवी है वो इंडिया का क्या बात  है, कुछ लोग अन्न के लिए तड़पते है और नेता कहते  है, गरीबी खत्म पर गरीबी खत्म कहने पर वो अपनी रोटी कैसे सकेंगे बस एक आश्वाशन पर सबको  टहलाया करेंगे 

माँ

माँ  भावना  है   अहसास है, माँ जीवन है अनमोल है, माँ बच्चे की लोरी है, माँ अहसास है उन सुखद पलो का, माँ धरा है जिसकी कोई सीमा नहीं, आसमान है जिसे कोई सीमा नहीं, माँ झरना है मीठे पानी का माँ होती है त्याग की मूर्ति माँ  का कोई  मोल नहीं माँ के बिना  दुनिया  अधूरी है , माँ जैसा कोई हो नहीं  सकता माँ के कदमो में स्वर्ग है, ऐसी माँ को में कोटि कोटि वंदन करते है 

किसान

किसान  के हाथ  में  कुदाल न हो  क्या  होगा? सोचा है किसी ने किसान जो हल चलाता  है, उसको कितनी  मेहनत करनी पड़ती है , फिर भी एक नमक की डली के लिए उसे किसी का मोहताज  होना पड़ता है, क्या होगा  किसानो का, जो अपनी धरती को छोड़कर जा रहा है कौन बचायेगा इन्हें जैसे डायनासोर खत्म हो गए वैसे ही किसान भी ख़त्म हो जायेंगे ओए और हर तरफ होंगे घर ही घर