संदेश

तेरी बातें

   तेरी बातें मुझको लुभाती है,  जीने का अंदाज सिखाती हैं,  अगर कोई परेशानी जीवन में आ जाए,  सही राह हमको दिखाती हैं,  तेरी यादे मुझको तड़पाती है,  सावन में आग लगाती है,  तेरी मुस्कराहट मेरे सारे ग़म भुलाते है, तेरी आँखों में मैने प्यार के समुंदर देखे हैं,  उन समुंदर में डूब जाना चाहती हूं,  तेरे लिए मेरी चाहत कभी कम नहीं होगी,  उन चाहतों में डूब जाना चाहती हूं,  तेरी बातें मुझको वो सब याद दिलाती है,  जिन को याद कर उन्हें दोहराना चाहती हूं,  चाँद को देखकर मुझे तुम याद आती हो,  उस चांदनी में मै डूब जाना चाहती हूं,  तेरी बातें मुझको लुभाती है  जीवन के कई रंग याद दिलाती हैं, गरिमा Lucknavi

करगिल दिवस

  26 जुलाई को हम करगिल दिवस मनाते हैं, आओ हम सब मिलकर उन वीर जवानों को याद करे, जिन्होंने करगिल की चोटी पर झंडा फहराया था,  क्या कहें उन बहनो को, जिनकी राखी खाक हो गयी,  उन माँ की क्या व्यथा कहूँ, जिनकी गोद सूनी हो गयी , क्या कहूँ उन दुल्हन को, जिनकी सेज युद्ध भूमि हो गई,  अगर जवान ना सीमा पर डटे रहे,  तभी चैन से हम सोते हैं,  जाड़ा गर्मी हो या बरसात,  सीना ताने खड़े रहते हैं,  बर्फ हो या रेगिस्तान,  दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए,  नमन है उन वीर जवानों को,  जिनके हाथों में हम सुरक्षित है,  मेरा शत शत प्रणाम है जवानों को ।। गरिमा लखनवी

हवा का झोंका

  तेरी यादों को लेकर एक हवा का झोंका आया, पूरे तन मन को सहला गया है, हवा का झोंका कह रहा हो, मैं तुम्हें तुम्हीं से चुरा ले जाऊँगा, उड़ा ले जाऊँगा तुम्हें इतनी दूर, जहाँ पर सकून के दो पल हो, जहाँ हम हो और तुम हो, एक ऐसे जहाँ में, जहाँ चारो ओर प्यार ही प्यार हो, हवा का झोंका मेरे मन मस्तिष्क को ताजगी दे रहा हो, हवा का झोंका मानो मुझसे बातें कर रहा हो,  तुम्हारी लट गालों पर कितनी खूबसूरत लग रही है, तुम इस जहाँ में खुशिया बिखराओ, तुम रोते हुए लोगों को हसाओ, हवा का झोंका तेरी यादों को लेकर संग आया है। । गरिमा लखनवी

सावन

   सावन की बूंदे मन को हर्षा रही हैं , ऐसे मैं तेरी याद मुझको तड़पा है,  बादल से बूंदे धरती पर टपक रही है,  पूरी पृथ्वी मानो हरी-भरी हो गई हो,  मेरे हाथों की हरी हरी चूड़ियां,  साजन को प्रदेश से बुला रही है,  बादलों ने जो कहर ढाया है,  सब जीवो को नया जीवन दे रही हो,  छोटी छोटी नदियां जो घर के आगे बन गई हैं,  उन पर कागज की नाव गोरी चला रही हूं,  खेत खलियान जो सुख रहे थे,  उन पर बादलों की बूंदे शीतलता दे रही हूं,  सजन तुम आ जाओ ऐसे मौसम में,  मेरा सोलह सिंगार तुम्हें बुला रहा है,  सावन के भीगे भीगे पल,  मुझे हर पल तेरी याद दिला रहा है।  गरिमा लखनवी

योग दिवस

   आओ हम सब योग करे, अपनी जिंदगी को निरोग करे, तन मन स्वस्थ रहे हमारा, आओ यह संकल्प करे, ऋषि मुनियों ने समझाया, फिर भी हमको समझ ना आया, शरीर योग  से स्वस्थ रहे हमारा, यह हमको अब समझ में आया, मानव मन को समझाना होगा, योग की अलख जलाना होगा, सबको योग का महत्व समझाना होगा, इसमे ना कोई खर्चा ना कोई जीम , पार्क या घर पर चटाई बिछा कर, योग करे सब मिलजुलकर, जीवन मिला बड़े नसीब से, इसका भी ध्यान रखें हम, योग दिवस का करे सम्मान, यही बिडम्बना है हम सब की, हमने योग बहुत बाद में अपनाया, योग दिवस की बहुत बहुत बधाई। । गरिमा लखनवी

पिता जीवनदाता

   पिता  जीवनदाता होते है, माँ की तरह प्यारे होते है,  माली की तरह सीचा हमको,  सब दुखो से बचाकर रखा हमको,  जैसे  पॊधो  को माली सम्हालते है, वैसे पिता हमें सम्हालते है, पिता हर बात हमारी पूरी करते हैं,  अपने भूखे रहकर भी वो पेट हमारा भरते है, पिता दुखो की परछाई भी हम पर  पड़ने नहीं  देते हैं,  पिता से ही बच्चो  का दुलार है, पिता से हर त्यौहार है पिता से ही माँ का सुहाग है, पिता से ही जीवन का  संचार है, पिता नहीं तो जीवन अनाथ है, पिता भगवान के बाद दूजा नाम है, पिता नहीं तो जीवन बेकार है, पिता ही जीवन की साँस है, पितृ दिवस पर उनको कोटि कोटि प्रणाम है। । गरिमा लखनऊ

कारगिल दिवस

 उस दिन की याद ताजा हो गई,  जब मेरे बेटे का शरीर तिरंगे मे लिपटा हुआ आया था,  उस तिरंगे के कोने में एक खत पाया था,  मा तुम रोना नहीं तुझे कसम है मेरी,   बहना से कहना तेरा भाई कब्र पर सो रहा है,  वहाँ जाकर राखी बांध कर आ जाना, मैं वापस आऊंगा देश की रक्षा करने के लिए,  हम जो चैन से सोते हैं,  भारत मां के सपूत रोते हैं,  हर मां धन्य हो गई तुम्हें पाकर, हर जवान देश पर कुर्बान हो गए  , झुक गया है देश मा की महानता के आगे, बेटे की हिम्मत को भारत मा भी नमन कर रही हैं,   हर बहन धन्य हो गए तुम्हारे जैसा भाई पाकर,  हजारों बहनों की इज्जत बचाई, हर पिता का सीना गर्व से भर गया,   दुश्मन को बता दिया हम कितने फौलाद हैं,  हर दुश्मन ढेर हो गया कारगिल जाकर,  कश्मीर नहीं देने देंगे हम उनको,  हर पाकिस्तानी जान गया कारगिल युद्ध के बाद,  भारत में शेर रहते हैं उनसे पंगा लेना आसान नहीं है ।। गरिमा लखनवी