संदेश

शिव की,महिमा

शिव  जी बहुत भोले है,  भोले भंडारी कहलाते है उनकी  महिमा है निराली  सबके दुःख  हरते है लोगो को सुख देकर बाकी  विष वो पीते है सब  तेरे दर्शन को तरसे सब तुझसे मिलने को आये कहा है भोले दर्शन दो देश में हो रहा अत्याचार, मिटा दो अंधकार क्यों बेबस है जनता क्यों नहीं पीते   विष  प्याला विष है धन,  जिसने छीना अमन चैन हर कोई एक दुसरे का प्यासा कहा गया वो भाईचारा शिव तेरे इस संसार में बहुत हो गए रावण अब लो फिर से अवतार तुम हो सके फिर भाईचारा तुम ही मिटा सकते हो  अँधियारा भोले तुम हो कहा 

मुझे जाने दो

कोई पुकार रहा  है मुझे जाने दो पर कोई जाने नहीं देता कहा जाने को है बेक़रार घर में सभी उसका कर रहे है इंतजार पर वो नहीं आता सभी को लगा चला तो नहीं गया आती है आवाज़ मुझे जाने दो क्यों तड़प रहा है वो किसका है इंतजार उसे आता नहीं समझ किसी ने पूछा उससे किसका कर रहे हो इंतज़ार कहा है जाना तुम्हे आवाज़ आती है मुझे जाने  दो मत रोको मुझे इस जहाँ से मेरा मन भर गया इस जहाँ से जाना है, उस दुनिया में जहाँ पर शरीर नहीं जाता है, वो दुनिया इस दुनिया से बढ़िया है आवाज़ आती है तुम्हे कैसे पता कि वो दुनिया हसीन  है वो होता है परेशान कहता है मुझे जाने  दो एक आती है आवाज़  तेरे बाद  क्या होगा तेरे माँ -पिता का आती है रोने कि आवाज़ इस दुनिया में कोई किसी का नहीं रिश्ते नाते सब यही रह जाते है यह दुनिया मुझे रास नहीं आयी, मुझे जाने दो , मुझे जाने दो इस दुनिया से मुझे जाने  दो   

उदास मन

नया साल नयी उमंगे फिर भी मन उदास है गोरी का क्या हुआ जो नहीं पूरी हुई हसरते, सब तरफ छायी है उमंगे तरंगे क्या हुआ जो नहीं आया पिया खुश रहने का मौसम है नयी बाते नयी उमंगे फिर क्यों तुम उदास हो क्यों फैला है चारो तरफ तुम्हारे अँधियारा एक दीप जलाओ खुशी का और रंग दो अपने मन को दूसरी कि खुशियो में क्या पता कितना है अँधेरा अपने दुःख भूल गोरी दूसरो के दुःख मिटाओ यही है नया साल फिर क्यों है मन उदास अब तो थोडा मुस्करा दो

मानवता खो गयी कही

आज मानवता खो गयी कही हर कोई लूटने में  लगा है कैसे हम  आगे बढे इसी सोच में  डूबा है लूट रही है अस्मिता नारी की कहा रह गयी मानवता किसी  को हो दुःख तो लोग  मजाक बना देते है कहा है संवेदना बड़े घरो में जो रहते है वो और भी दुखी है हर कोई उसका उठाता फायदा   है   कहा है मानवता  हर तरफ अँधियारा है कौन दीप जलाये और जो खो रही मानवता उसे ढूढ कर कहा से लाये गरिमा 

नारी सहने का नाम नहीं

नारी सहने का नाम नहीं है, नारी जननी है,नारी रक्षक है,   अगर नारी न  यह दुनिया बेगानी है, फिर भी क्यों होते जुल्म होते नारी पर पुरुषो का शिकार बनती है नारी पर फिर भी सहती है माँ, बेटी, बहन, भाभी है अनेको रूप इसके नारी को जाता है पूजा पूजा फिर भी कलयुग में रहे है सितम इस  पर  क्या जन्म इसलिए है नारी का इसे  सताया जाये जलाया जाये कब तक सहेगी नारी क्यों भगवान ने बनाया  सहनशील नारी नारी सहने का नाम नहीं है अब  एक चिंगारी है नारी ब   

बचपन

प्यारा बचपन न्यारा बचपन और  कितना दुलारा बचपन रोते  है हम चुप होते है फिर  सपनो में खो जाते है, परियो  की रानी आती है खूब हसाती खूब खिलाती कितना सुखमय बचपन न  कोई चिंता न परशानी सुनते  हम राजा की  कहानी नानी दादी हमें सुनाती हम न सोते  वो सो जाते कितना भोला बचपन बाते छोटी छोटी कहते  सब सुन हस देते प्यार  सभी को मिलता ऐसा प्यारा बचपन बचपन सुखमय होता है प्यारा और दुलारा बचपन 

स्वप्न बिकते है

 स्वप्न बिकते है बोलो  खरीदोगे कोई रोजगार  का स्वप्न बेचता  तो नेता महगाई कम करने का गरीबी हटाने का साधू बेचते है भगवान को पाने का  कहते है कई लोग  हम आपको  बना देंगे अमीर, हर कोई स्वप्न में है डूबा  अभी  आ रहे है चुनाव  सब को यही लालच है हम  बन जाये   अमीर कोई  काम नहीं करना चाहता कंपनी कहती है मेरा सामान खरीदो तो  तुम्हे मिलेगा सोना का सिक्का पर जनता है मुर्ख  वो ये नहीं समझती कोई   अपने घर से कुछ नहीं लाता सब जनता से  करते है स्वप्न  बिक रहे है सब सपनो में  जीते है  क्या होगा नोजवानो का  जो इन दिवास्वप्न में जीते है स्व्प्न बिकते है बोलो खरीदोगे