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डिपेरशन क्यों होता है

डिप्रेशन क्यों होता है? यह बहुत ही विचारणीय प्रश्न  है जब कोई दुखो में डूब जाता है, सारी  दुनिया उसे काली लगने लगती है, तब  व्यक्ति को कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। अवसाद का अर्थ मनोभावों से सम्बन्धी दुःख से होता है। अधिकतर यह देखा गया की जो प्रेम में ज्यादा डूबा है, और उसे उसका प्रेम नहीं मिला है, तो वह अवसाद में डूब जाता है। अवसाद की अवस्था में व्यक्ति स्वयं को लाचार समझता है, प्रेम ही नहीं वरन आज की परिस्थियों को देखते हुए बहुत सारे  कारण  अवसाद के होते है। अवसाद के कारण   नींद  नहीं आती है। विश्व सवास्थ्य संगठन के अनुसार अवसाद बहुत सामान्य बीमारी है। इस बीमारी का समय ६-८ महीने रहता है, अगर आपके किसी बहुत प्रिय की मृत्यु हो जाये और आप दुखी है, तो यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, और उसके दुःख में आप बहुत भावुक रहते है तो आप अवसाद का शिकार होते है। अगर आप जीवन में खालीपन महसूस कर रहे है तो अवसाद में है एक सर्वे के अनुसार महिलाओ को  जल्दी अक्साद होता है पुरुषो के अपेक्षा मानसिक रोग पागलपन नहीं है           जब कोई अवसाद ...

पेड़ और बारिश की व्यथा

पेड़ और बारिश का सम्बन्ध भी कैसा है, दोनों एक दुसरे के पूरक है, पेड़ो को काट रहे है बारिश  की मार झेल रहे है कौन बचाएगा पेड़ पोधो को जिनको मानव काट रहा है पक्षी घर कैसे बनायेंगे फिर पक्षी को कौन बचाएगा धरती पर पेड़ पौधे  न होंगे तो जीवन कैसे बचेगा पेडो   के काटने से खतरा बढ़ रहा है एक समय होगा न बारिश  होगी न पौधे होंगे कही गर्मी की मार पड रही है कही बरसात बहुत हो रही है बहुत मार झेल रही है प्रकृति पेड़ पौधे हमारी धरोहर है हरियाली मन को अच्छी लगती है अगर हम न सुधरे तो आने वाली पीढ़ी  हरियाली कैसे देखेंगी पेड़ न होगी तो सावन में गोरी झूले कैसे झुलेगी गरिमा

रंगीन शाम

शाम जब होती है, बहुत रंगीन होती है। ढलती हुई शाम भी कुछ कहती है, परिंदे भी घर को जाते है, शाम एक आनंद लेकर आती है। दिन भर की थकान दूर हो जाती है, जिंदगी में भी एक शाम आती है, जब हम बूढ़े होते है, फिर याद आती है, हर एक उस पल की, जब हम बच्चे  थे, कैसी कैसी शरारते करते थे, हर वह बात याद आती है, जिंदगी की उस शाम तुम भी बहुत याद आ रहे थे, जब वारिश मेरा तन मन भिगो रही थी, कह रही थी यह शाम यही ठहर जाए, मैं जी लूं कुछ और देर, क्या पता कब जीवन की शाम हो जाए।। गरिमा

जीने का हक़

मैं  भी औरत हूँ क्या मुझे भी जीने का हक़ है खुद का अस्तित्व मिटाकर किसी का घर बसाती  हूँ घर की सारी जिमेदारियो को उठाती हूँ हर युग में मुझे ही सारी परीक्षा देनी पड़ती है क्या मुझे भी जीने का हक़ है ममता की मूरत हूँ , सबका ध्यान रखती हूँ फिर भी मेरे हर अरमान कोदबा  दिया जाता है मुझे माँ की गुड़िया समझा जाता है क्या मुझे भी जीने का हक़ है मेरा हर कदम पर अपमान  किया जाता है मुझे हर समय छला गया मेरे हक़ में मुझे कुछ नहीं मिला कब तक बेड़िया पैरों में पड़ी रहेगी क्या मुझे जीने का हक़ नहीं है मैं भी जीना चाहती हु मैं अपना सम्मान चाहती हु मैं आसमान में उड़ना चाहती हु बेड़ियों को तोड़कर उड़ जानाचाहती  हु मुझे भी जीने का हक़ है गरिमा

राधा कृष्ण का प्रेम

प्रीत की रीत ऐसी लगी कान्हा, अब छूटे से न छूटेगी।  मैं  दुनिया के हर सुख दुःख भूली,  कृष्ण अब तेरा ही सहारा है।  दुनिया में प्रेम की कमी हो गयी,  कृष्ण तुम वापस आ जाओ।  हम तुम से ये विनती करते है, राधा के पास आ जाओ।   कृष्ण का प्यार अमर है,  राधा ने दिल  का नज़राना भेजा है।  दही मिश्री तुम्हे बुलाती है , बासुरी की धुन याद दिलाती है।  वन वन हम भटक रहे है,  तुम गाय चराने  आ जाओ,  राधा तुम्हारी राह देख रही है।  उसकी पास तुम आ जाओ,  राधा को कृष्ण की यादो ने घेर लिया,  तुम उसके सपने सजा जाओ।।  गरिमा 

चलो गांव की ओर

आओ सब गांव की और चले, जहा खेतो में हरियाली हो , जहा मंद मंद हवा चले, जहा चारो और खुशिया बिखरी हो, सब एक जगह पर बैठे हो, सब एकदूसरे का हाल कहे, आओ सब गांव की ओर चले, वो पुराना  बरगद का पेड़ बहुत याद आता है वो बचपन के झूले वो दादी का प्यार गांव की याद दिलाता है वो बैलगाड़ी की सवारी वो कुँए से पानी भरना वो आम तोड़ तोड़ कर खाना गांव की याद दिलाता है आओ सब गांव की और चले जहा मंद मंद हवा बहे गरिमा

सुनहरे ख्वाब

सुनहरे ख्वाब शीशे की तरह होते है झूठे रिश्तो को कब तक निभाएंगे मीठी यादें  हमको तड़पाएंगी तकिये की किनारे भिगोएगी एक दिन टूटेगा भ्रम का जाल सारे सुनहरे ख्वाब टूट जायेगा रिश्तो की डोरी मजबूत बाँधी  है एक दिन पर्दा उठेगा और डोर टूट जाएगी फिर क्या करेंगे उन सुनहरे ख्वाबो का जो आज हम  बुन  रहे है आँख खुल गयी और ख्वाब टूट गया सुनहरा ख्वाब है हमारा रिश्तो में हमेशा मिठास रहे हर तरफ हंसी का माहौल रहे आँख खुली तो देखा शीशा टूट गया हर सुनहरा ख्वाब टूट के बिखर गया गरिमा