संदेश

विरासत

हमें नदिया फूल पानी सब मिला विरासत में,  फिर हम इसे क्यों करते है बर्बाद, ये न हो तो क्या जीवन संभव है पर हम इन्हें बर्बाद कर रहे  है फिर कोसते   है  भगवान को की  बारिश  नहीं हो रही  है सूखा पड़  रहा है, जो हमें मिला है उसकी हम रक्षा नहीं कर पा  रहे है, तो भगवान् को क्यों  दोष देते है जो हमें मिला उसकी रक्षा करे, और पेड़ लगाये अपनी विरासत को बचाये

अब देश में न आना तुम गाधी

अब देश में न आना तुम गाधी ये देश अब रहने के लायक बचा नहीं हर तरफ हिंसा है, भष्टचार फैला है हे गांधी न आना अब इस देश तुम थाना कोर्ट कचहरी करके न कर पायोगो सत्याग्रह जब चलेगी लाठी डंडा तब तुम क्या कर पायोगो अगर न होगा स्विस बैंक में एकाउंट तो क्या तुम कर पायोगे हे गांधी न आना अब इस देश तुम खादी हो गयी इतनी मंहगी कैसे चरखा चलाओगे देश की हालात पर आयेगा रोना फिर तुम ऑसू बहाओगे कैसे जायोगे लाल किला तुम और कैसे झण्डा फेहराओगे हे गांधी न आना अब इस देश तुम आरक्षण की हवा चली है कैसे इसे मिटायोगे दारु और दवा मंहगी है कैसे गरीब का भूख मिटायोगे हे गांधी न आना अब इस देश तुम

जाड़ा का दिन

जाड़े की सुबह एक दिन सूरज की किरणें से खेलती तितली पूछती है दूसरी तितली से तुम इतनी उदास क्यों है  वो बोली सब तरफ अंधकार है   जब सूरज की किरणें  आएगी  तो क्या होगा मेरे देश का    इसी चिंता में हूँ      हर तरफ शोर है हर कोई बेकारी झेल रहा है  जाड़े की सुबह  सूरज निकलने से पहले ये चिंता  सब   तितली करती है क्या होगा मेरे देश का

हम सब एक है

एक धरती एक उपवन हम सब उसके बासी है मिली धूप हमें एक बराबर मिटटी के कर्ण के सामान हम रूप रंग हो भले अलग हमारे पर मन से हम एक  है अलग अलग  है बोली हमारी हम सब  फिर भी  एक है सूरज एक हमारा है जो किरणे फैलाता है देता है रौशनी हमको जग का  अँधेरा मिटाता है एक चाँद है जो देता है शीतलता हमको फिर भी हम सब  एक है कितना कुछ दिया हमको पर हम समझ  न पाए लड़ते  रहते है हम सब क्यों न प्यार की भाषा समझाए हम सब एक है ये सबको  बताये

पिता

पिता एक वृक्ष के सामान होता है, जिसकी छाया में बच्चे अपना घर बनाते है और माँ होती है उसकी छाया पिता की बाहें होती है मजबूत सबको साथ लेकर चलती है जाड़ा हो या गर्मी वो सब सह कर भी देता है बच्चो को सुरक्षा अपनी सुख की   परवाह न करते देता है ख़ुशी अपने बच्चो को पिता होता है महान हर छोटी छोटी बातों का रखता है ख्याल सब माँ को देते है सम्मान पर दोनों का है काम महान पिता न हो तो अधूरा है जीवन पिता है सारे घर की शान लोरी नहीं सुनाता है तो क्या बच्चो को घूमता है वो उसके साथ बच्चे भी होते है खुश पिता को भी मिलना चाहिये सम्मान

नया सवेरा

नया सवेरा आया बहुत सारी  खुशियाँ  लाया पर्वत पर छायी लाली दुनिया में एक नया दिन आया सब तरफ छायी खुशियाँ नया सवेरा आया सबके घर  में आने वाली ढेर सारी खुशियाँ भागेगा अँधेरा आयेगा उजाला सबको मिलेगी अपनी मंजिल गरीबी जायेगी सबके हाथो होगी तरक्की नया सूरज लाया अपार खुशियाँ बच्चो को मिली उनकी खुशियाँ सबको मिला पढ़ने का अधिकार देश का दिन भी है बदलने वाला नया सूरज सबके लिए लाया ढेरो खुशियाँ हर तरफ है खुशियाँ बिखरी सबके आँगन महका नया सवेरा आया

हिंदी की दुर्दशा

एक और हिंदी दिवस आ गया और हमने हिंदी को  याद कर  लिया लिया  तो क्या मात्र हिंदी दिवस मना लेने से इतिश्री होगा  हिंदी  की   दुर्दशा का  क्या  कहना आज तो अंग्रेजी भी  हिंदी में मिलने लगी है   आलम यह है कि हर जगह  अंग्रेजी  का असर है अब तो हिंदी भी अंग्रेजी का गुलाम हो गयी है, आज हिंदी रोती है कि आने वाली मुझे कैसे समझेगी मात्र हिंदी दिवस पर हिंदी को याद कर लेना काफी नहीं हिंदी चीखकर कह रही है कि मुझे बचाओ ! मुझे बचाओ पर उसकी चीख सुनकर भी हम अनसुना कर देते है