शनिवार, 31 मई 2014

भारत जैसा कुछ नहीं

   भारत जैसा कोई नहीं
सोने की चिड़िया कहलाता है
यहाँ सब कुछ मिलता है,
प्यार भी मिलता  है यहाँ पर
पर क्या हुआ मेरे भारत को
प्यार की जगह नफरत ने ले ली
 क्यों हो  गए ऐसे लोग मेरे देश देश के
जहा  बहती थी प्यार की की धारा
 वहाँ बहती है खून की   धारा
जहा होती है देवी  की पूजा
वही आज लड़कियों को कुछ नहीं समझा जाता
क्या हुआ मेरे देश को
किसकी नज़र लग गयी  देश को

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (01-06-2014) को "प्रखर और मुखर अभिव्यक्ति (चर्चा मंच 1630) पर भी है!
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

anil uphar ने कहा…

गरिमा जी लाजवाब लेखन बधाई