पिता जीवनदाता

 पिता होता है जीवनदाता
माँ की तरह प्यारा
माली की तरह सीचा हमको
बचाकर रखा हमें सब दुखो से
जैसे  पॊधो  को सम्हालते
वैसे पिता हमें सम्हालते
हर बात हमारी करते पूरे
अपने भूके रहकर भी वो
पेट हमारा भरते है,
दुखो की परछाई भी हम पर
न  पड़ने देते
पिता से ही बच्चो  का दुलार है
पिता से हर त्यौहार है
पिता से ही माँ का सुहाग है
पिता से ही जीवन का  संचार है
पिता नहीं तो जीवन अनाथ है
पिता भगवान के बाद दूजा नाम है
पिता नहीं तो जीवन बेकार है
पिता ही जीवन की साँस है

टिप्पणियाँ

इस रचना ने आपके मन के भावों को बहुत खूबसूरती से अभिव्यक्त किया है.
India Darpan ने कहा…
बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


हैल्थ इज वैल्थ
पर पधारेँ।

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