क्या लिखू आज मन बहुत उदास है होने वाली कोई बात है दिन भी बहुत ख़राब है, सब कुछ उजड़ा उजड़ा है फिर भी लगता अपना है क्या लिखू कैसे लिखू समझ नहीं आता है सारी दुनिया लगती बेगानी छाया हुआ पतझड़ है, सब कुछ बिखरा बिखरा है, लगता है खो जाओ कही अँधेरे में न कोई खोज पाए गुम हो जाऊ किन्ही तंग गलियों में सब कुछ गड़बड़ सा लग रहा है लगता है ऐसे आ रहा है कोई दबे पाँव कौन है लगता है यमराज तो नहीं है जो आ गया हो लेने मुझे
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अप्रैल, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
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आखे कितनी प्यारी है तुम्हारी आखे कुछ अच्छा देखती है कुछ बुरा पर अगर आखे न हो तो कितनी वीरान लगती है दुनिया सारी, आखे खुली तो सब कुछ सुहाना और बंद हो तो रोये जमाना सारा आखे है कितनी अनमोल इसका नहीं कोई मोल कितनी प्यारी चीज़ दी है भगवान ने, पर इनसे हम देखते है, दुनिया की बुराई, क्यों नहीं देखते है अच्छी बाते जब बंद होती है हमारी आखे तो लोग कहते है वो अच्छा था पर अब क्या अब तो आखे हो गयी बंद
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लड़की लड़की क्या होती है एक मोम की गुडिया जिसने चाह खेला और ठुकरा दिया क्या उसका दिल नहीं होता, क्या उसके अरमान नहीं होते क्यों सभी कहते है वो उसकी मर्जी से चले लड़की होना क्या गुनाह है? तभी तो सभी उसे पसंद नहीं करते वो जातना नहीं जानती, वो तो बस देना जानती है फिर भी सभी उसे गलत तरीके से देखते है, बस उसे सबकी बात माननी है उसके दिल का हाल कोई नहीं समझता क्यों क्या उसके मर्जी नहीं होती लोग कब समझेंगे की लडकियों में भी जान होती है, और उन्हें भी जीने का हक़ है
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क्यों टूट रहे है रिश्ते मैं की भावना हो दिल में, तो हर रिश्ता गलत लगता है इसी का खामियाजा सबको मिलता है पर हम लोग चूर है सुख खोजने में जो है उसकी कदर नहीं जो नहीं है उसके लिए लड़ रहे है इसलिए टूट रहे रिशते हम किसी की कदर ही नहीं करते आज अहम् की भावना बहुत है सुख की खोज बड़े घर, बड़े कार में जा रहा है खोजा सब अपने में है चूर कोई किसी नहीं चाहता है समझना सब मस्त है अंधी दौड़ में जो ये समझ ले की अहम् कुछ नहीं होता तब रिश्ते टूटने से बच सकते है
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खुशी को ढूँढना खुशी को कौन पा पाया है आज सभी दुखी है और नकली हंसी लगये घूम रहे है, और बड़ा घर, पैसे, बड़ी कार पर क्या खुशी इसमें मिलती है, ये बड़ा कठिन सवाल है खुशी तब मिलती है जब हम किसी की होठो पर ला सके मुस्कान जब आप किसी भूखे इन्सान को खाना खिलाये तब मिलती है खुशी पर आज की दुनिया में कोई नहीं पोछता किसी के आसूं तो नकली खुशी से सब खुश है क्यों नहीं पाते सच्ची खुशी
किसान
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किसान खेत में हल चलाता कितनी मेहनत से फसल उपजाता, फिर भी क्यों रहता है भूखा ये कोई समझ न पाता, क्यों उसके बच्चे जीते तंग हाल जिन्दगी जब की अगर किसान न हो तो सब रह जाये भूखे, पर कोई समझ न पाता, उसका दर्द वो है क्यों दुखी सब उसको मिलकर लूटते, वो न कह पाता किसी से सारे दिन हल जोतता, पर वो न हो पाता सुखी क्या वो इन्सान नहीं नहीं कोई क्यों नहीं समझ पाता
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प्रकत्ति कितनी ताकतवर प्रक्रत्ति कितनी ताकतवर है ये सभी जानते है, फिर भी उससे करते है खिलवाड़ प्रक्रति शांत है, पर जब हम उसके साथ करते है खिलवाड़ प्रक्रति हरी है, पर हम उसे सुखा रहे है हर तरफ मकान बनाकर, पर जब प्रक्रति लेती है अपना बदला तो आते है तूफ़ान, सूखती है धरती पर हम इन्सान नहीं समझ पाते, प्रक्रति से पंगा नहीं लिया जाता प्रक्रति से प्यार किया जाता है
बहुत मुश्किल है
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नदियों में पानी रह पाना, पानी की बूँद बूँद बचाना बहुत मुश्किल है, जंगल को बचाना, हरियाली का रह पाना बहु मुश्किल है, चिडयों का पेड़ो पर घोशला बनाना बहुत मुश्किल है, पेड जैसे कट रहे है कोयल का गाना बहुत मुश्किल है, ठंडी हवा का चलना मघो का बरसना बहुत मुश्किल है, नदियों में कल कल की आवाज़ आने वाली पीढ़ी कैसे सुन पायेगी उन्हें नदियों का ज्ञान करना बहुत मुश्किल है