सोमवार, 12 सितंबर 2016

बेटी घर की शान

घर की शान होती है बेटिया
 दिल का अरमान होती है बेटिया
बेटो से बढ़कर होती है बेटिया
पापा   की आन होती है बेटिया
घर से लेकर बाहर तक का मान होती है बेटिया
न हो बेतिया तो जग हो सूना
हर  त्यौहार की रंगत रंगत होती   बेटिया
भारत की शान बेटिया
बेटी से ही हर जगह है रौनक
फिर भी ये कैसी बिडम्बना
माँ के रूप में लोग पूजते है बेटियों  को
 और घर में बेटियो को पीटते है
क्यों ससुराल में बेटियो को तंग किया जाता है?
ससुराल  की शान होती है बेटिया
- गरिमा

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (14-09-2016) को "हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-2465) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'