सोमवार, 28 अप्रैल 2014

वोट

वोट मांगते चलो  , वोट मांगते चलो
क्या तेरा क्या मेरा, सब है देश का रे
वोट मांगते चलो, वोट मांगते चलो
ए भैया जरा वोट देना, हम आये वोट मांगने
कहे को वोट दे हम तुम तो हो ठग भैया
वोट मांगते चलो  , वोट मांगते चलो
हम पानी देंगे बिजली देंगे भरस्टाचार मिटायेंगे
भूख, भय,को दूर भाएंगे
सबको परखा हमको परखो
यही नारा लगाएंगे
वोट मांगते चलो  , वोट मांगते चलो 
आया है चुनाव का मौसम, सब मस्त है इस  मस्ती में
क्या युवा क्या बूढ़े सब है वोट डालते
वोट मांगते चलो  , वोट मांगते चलो

3 टिप्‍पणियां:

अनूप शुक्ल ने कहा…

बढिया। मौसमी कविता। आजकल चुनाव का मौसम है न!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (29-04-2014) को "संघर्ष अब भी जारी" (चर्चा मंच-1597) पर भी होगी!
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kaushal Lal ने कहा…

सुन्दर सारगर्भित रचना...