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सच्चा प्यार

   सच्चा प्यार क्या होता है,  ये कोई तुमसे पूछे,  निस्वार्थ भाव से प्यार करते हो,  कोई तमन्ना नहीं है तुम्हारी,  बहुत प्यार करते हो तुम,  दिल की गहराई में उतर कर देखो,  प्यार बहुत अनमोल होता है,  तुम बहुत अच्छे लगने लगे हो,  तुम्हारी हर हरकत मन को गुदगुदाती है, तुम्हारे साथ बिताया हर पल बहुत याद आता है,  प्यार का अह्सास बहुत खूबसूरत होता है,  मेरी चाहत तेरे लिए है,  मेरी सासें तुम्हारे लिए है,  मेरी हर धड़कन पर तेरा नाम लिखा है,  प्यार भगवान की इबादत है,  प्यार निस्वार्थ होता है,  सच्चा प्यार बड़े नसीब से मिलता है।। गरिमा लखनवी

इश्क खुद से हुआ

  जब इश्क खुद से हुआ,  एक बार फिर इश्क हुआ,  इस बार खुद से इश्क हुआ,  खुद को जब आईने में देखा,  तो लगा खुद से अच्छा कोई नहीं,  दुनिया क्या कहती मेरे बारे में,  उसकी कोई परवाह नहीं,  जो खुद को अच्छा लगे वो काम करो,  दूसरों के आंसू का सम्मान करो,  कुछ ऐसा काम कर जाओ,  ये दुनिया तुम्हें याद करे,  जो कमियाँ निकालते थे मुझमे,  वो आज मेरे मुरीद बन गए,  हम से है ज़माना,  ज़माने से हम नहीं,  क्यों नहीं करती थी खुद से प्यार,  ये सोच अब डरती हूं,  क्या नहीं था मेरे पास , ये समझ नहीं पाती हूं,  ए दिल कुछ नहीं साथ जाता , ये तु समझ क्यों नहीं पाता है,  बस ये समझ ले,  तेरा जन्म खुशियां बिखेरने के लिए हुआ है,  खुद से भी ही इश्क कर तू,  यही तेरी आत्मा की आवाज़ है।। गरिमा लखनवी

हमारा रिश्ता

   हमारा रिश्ता भी क्या खूब है,  जो कोई समझ ना सका,  हम दोनों बह गए इस रिश्ते में, ऐसा लगा मानो,  कई सदियों से तुम्हें जानते हैं,  क्या पूर्व जन्म का रिश्ता तो नहीं,  तुम पास नहीं होते,  तो लगता है कुछ खाली सा है,  दिल के किसी कोने से टीस आती है,  तुम्हें देखे बिना मन नहीं मानता,  क्या तुम्हें भी ऐसा अह्सास होता है,  तुमसे बात नहीं होती तो ऐसा लगता है,  जैसे आज दिन नहीं निकला,  तुम अच्छे लगने लगे हो,  तुम सच्चे लगने लगे हो,  है कोई रिश्ता हमारा तुम्हारा,  जिसे हम कोई नाम ना दे तो अच्छा है, तुमसे बातें करना मन को लुभाता है,  जाने कौन सा जादू है तेरी हंसी में,  मन गुदगुदाने लगता है,  अपना कीमती समय देकर मेरा मान बढ़ाता है,  हर कदम पर मेरा साथ देते हो,  जो दिल में रहते हैं वो दिल में रहते हैं,  प्रभु का धन्यवाद जिन्होंने तुम्हें मेरी जिन्दगी में भेजा।। गरिमा लखनवी