महिला दिवस

शक्ति का रूप है नारी
प्रेम की छाँव है नारी
ठंडी हवा का प्यार है नारी
सेवा का भाव है नारी
विस्वास का नाम है नारी
कठिन समय में सही रह दिखती है नारी
प्यार का भाव जगती है नारी
हर रूप में हर हाल में खुश रहती है नारी
सबको खुशिया देती है नारी
जीवन का नया पाठ  पढ़ाती है नारी
जीवन अधूरा है नारी बिन
सबको राह  दिखाने वाली लुटती है नारी
क्यों है इसके सब दुश्मन
क्यों छीन लेते है इसकी खुशिया
प्यार और दुलार क्यों नहीं मिलता
शक्ति को इसकी पहचान नहीं मिलता
जीवन में खुशिया है नारी संग
नारी तू पहचान अपने में
शक्ति को जान अपने में
खुशिया है अपार तेरे में
प्रणाम है तुझको
-गरिमा

टिप्पणियाँ

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (18-11-2017) को "नागफनी के फूल" (चर्चा अंक 2791) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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