शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

सादर नमन

वीर जवान खड़ा हिम शिखर  पर
सीना ताने  हिम चट्टानों में
करता है वो हमारी रक्षा
सारी चुनौतियों को स्वीकार करके
हमें नाज है उन वीरो पर
जो अपनी भारत माता की रक्षा करते,
वो भारत माता के लाल
जिन्हे धरा पुकारती
ऐसे ही एक वीर है
जिनकी माँ धन्य है,
वो जिन्होंने हनुमनथप्पा को जन्म दिया
६ दिन तक लड़ते रहे मौत से
और मौत को दे दिया चकमा
पर वो नहीं लड़ पाया और आगे,
और वीरता से मौत  लगा लिया
धन्य हो हनुमनथप्पा तुम,
जो हार कर भी जीत गए
तुम्हे नमन हो
और  अश्रुपूर्ण विदाई
-गरिमा

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (14-02-2016) को "आजाद कलम" (चर्चा अंक-2252) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Asha Joglekar ने कहा…

सियाचीन को वीरों को शत शत नमन।