मंगलवार, 22 अप्रैल 2014

आज की राजनीति

आ गया मौसम चुनाव का
सब तरफ छाया है नशा चुनाव का
देश  के लिये लड़ने मरने को तैयार
हर कोई अपने को साबित करने को तैयार
उससे बड़ा देश भक्त कोई नहीं
सब देश की कर रहे है चिंता
पर चुनाव खत्म सब चिंता खत्म
वादे भूल जाते है,
वादे किये ही जाते है भूलने के लिए
पर जनता कितनी भोली है
कर लेती है यकीन
और हर बार मिलता है उसे धोखा
बन जायेंगे राजा एक बार फिर
और दे जायेंगे जनता को धोखा
कोई वादा नहीं होगा पूरा
हर कोई सेकता है अपनी रोटियाँ
बस पिसती है तो जनता बेचारी
क्या यही है राजनीति

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (23-04-2014) को जय माता दी बोल, हृदय नहिं हर्ष समाता; चर्चा मंच 1591 में अद्यतन लिंक पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनूप शुक्ल ने कहा…

चकाचक है!