स्वप्न बिकते है


 स्वप्न बिकते है बोलो  खरीदोगे
कोई रोजगार  का स्वप्न बेचता
 तो नेता महगाई कम करने का
गरीबी हटाने का
साधू बेचते है भगवान को पाने का
 कहते है कई लोग  हम आपको
 बना देंगे अमीर,
हर कोई स्वप्न में है डूबा
 अभी  आ रहे है चुनाव
 सब को यही लालच है
हम  बन जाये   अमीर
कोई  काम नहीं करना चाहता
कंपनी कहती है मेरा सामान खरीदो
तो  तुम्हे मिलेगा सोना का सिक्का
पर जनता है मुर्ख
 वो ये नहीं समझती
कोई   अपने घर से कुछ नहीं लाता
सब जनता से  करते है
स्वप्न  बिक रहे है
सब सपनो में  जीते है
 क्या होगा नोजवानो का
 जो इन दिवास्वप्न में जीते है
स्व्प्न बिकते है बोलो खरीदोगे 
 

टिप्पणियाँ

Manoj Sahara ने कहा…
बहुत बढ़िया
Manoj Sahara ने कहा…
बहुत बढ़िया
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (15-11-2013) को "आज के बच्चे सयाने हो गये हैं" (चर्चा मंचःअंक-1430) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
Naveen Mani Tripathi ने कहा…
bilkul samyik rachana ke sath aj ki paristhiyon pr sateek vyang
Vaanbhatt ने कहा…
मार्केटिंग का ज़माना है...कुछ भी बेच सकते हो...स्वप्न दिखा कर...बहुत खूब...
Onkar ने कहा…
सुन्दर प्रस्तुति
Neeraj Kumar ने कहा…
सुन्दर रचना
आशा जोगळेकर ने कहा…
अब आ रहे है चुनाव,
नये नये सपने बिकेंगे,
तुम्हे लुभायेंगे, ललचायेंगे
और आखिर में टूट जायेंगे।

सुंदर प्रस्तुति।
सुन्दर प्रसूति |
नई पोस्ट लोकतंत्र -स्तम्भ
sushma 'आहुति' ने कहा…
भावो का सुन्दर समायोजन......
garima ने कहा…
thanks to all of you

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्यारा हिन्दुस्तान

जीवन क्या है?