बुधवार, 13 नवंबर 2013

स्वप्न बिकते है


 स्वप्न बिकते है बोलो  खरीदोगे
कोई रोजगार  का स्वप्न बेचता
 तो नेता महगाई कम करने का
गरीबी हटाने का
साधू बेचते है भगवान को पाने का
 कहते है कई लोग  हम आपको
 बना देंगे अमीर,
हर कोई स्वप्न में है डूबा
 अभी  आ रहे है चुनाव
 सब को यही लालच है
हम  बन जाये   अमीर
कोई  काम नहीं करना चाहता
कंपनी कहती है मेरा सामान खरीदो
तो  तुम्हे मिलेगा सोना का सिक्का
पर जनता है मुर्ख
 वो ये नहीं समझती
कोई   अपने घर से कुछ नहीं लाता
सब जनता से  करते है
स्वप्न  बिक रहे है
सब सपनो में  जीते है
 क्या होगा नोजवानो का
 जो इन दिवास्वप्न में जीते है
स्व्प्न बिकते है बोलो खरीदोगे 
 

13 टिप्‍पणियां:

Manoj Sahara ने कहा…

बहुत बढ़िया

Manoj Sahara ने कहा…

बहुत बढ़िया

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : पुनर्जन्म की अवधारणा : कितनी सही

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : पुनर्जन्म की अवधारणा : कितनी सही

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (15-11-2013) को "आज के बच्चे सयाने हो गये हैं" (चर्चा मंचःअंक-1430) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

bilkul samyik rachana ke sath aj ki paristhiyon pr sateek vyang

Vaanbhatt ने कहा…

मार्केटिंग का ज़माना है...कुछ भी बेच सकते हो...स्वप्न दिखा कर...बहुत खूब...

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

Neeraj Kumar ने कहा…

सुन्दर रचना

आशा जोगळेकर ने कहा…

अब आ रहे है चुनाव,
नये नये सपने बिकेंगे,
तुम्हे लुभायेंगे, ललचायेंगे
और आखिर में टूट जायेंगे।

सुंदर प्रस्तुति।

कालीपद प्रसाद ने कहा…

सुन्दर प्रसूति |
नई पोस्ट लोकतंत्र -स्तम्भ

sushma 'आहुति' ने कहा…

भावो का सुन्दर समायोजन......

garima ने कहा…

thanks to all of you