रविवार, 16 जून 2013

पिता जीवनदाता

 पिता होता है जीवनदाता
माँ की तरह प्यारा
माली की तरह सीचा हमको
बचाकर रखा हमें सब दुखो से
जैसे  पॊधो  को सम्हालते
वैसे पिता हमें सम्हालते
हर बात हमारी करते पूरे
अपने भूके रहकर भी वो
पेट हमारा भरते है,
दुखो की परछाई भी हम पर
न  पड़ने देते
पिता से ही बच्चो  का दुलार है
पिता से हर त्यौहार है
पिता से ही माँ का सुहाग है
पिता से ही जीवन का  संचार है
पिता नहीं तो जीवन अनाथ है
पिता भगवान के बाद दूजा नाम है
पिता नहीं तो जीवन बेकार है
पिता ही जीवन की साँस है

2 टिप्‍पणियां:

संजय भास्‍कर ने कहा…

इस रचना ने आपके मन के भावों को बहुत खूबसूरती से अभिव्यक्त किया है.

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


हैल्थ इज वैल्थ
पर पधारेँ।