शुक्रवार, 7 मार्च 2014

और माँ चली गयी

माँ सुखद अहसास
सुख की  छाव का अहसास
माँ न हो तो क्या है जिन्दगी
हर सहारा होती है माँ
जीने का अहसास है माँ
हर दुःख सहती माँ
जब होती बीमार माँ
तो किसी से न कहती
कितने अभागे होते है वो
जिनकी माँ नहीं होती
माँ पड़ी बीमार
बच्चो ने नहीं की परवाह
जिस माँ ने बच्चो के लिए किया
आज उन्होंने ही पराया  कर दिया
माँ रोती  रही
पर किसको है परवाह
किसी ने न पूछा
कुछ खाया  या नहीं
उस रात माँ थी बेचैन पेरशान
पर किसी ने न कि परवाह
माँ कहती रही में जा रही हू
किसी ने न सुनी उनकी आवाज़
क्या इसी दिन के लिए होते है बच्चे
माँ जा रही थी और कह रही थी
खुश  रहना मेरे लाडलो
फिर भी न सुनी किसी ने उनकी आवाज़
और माँ चली गयी
इस दुनिया से
देकर बहुत सारा आशीर्वाद
माँ होती है महान
माँ को प्रणाम  

1 टिप्पणी:

anil uphar ने कहा…

माँ अपने आप मेँ एक सम्पूर्ण अध्याय है ,आपकी लेखनी लाजवाब है ।