सोमवार, 29 जुलाई 2013

एक युग पुरुष

था सच्चा बेटा इस धरती का
कर गया बड़े वो
जिसके आगे दुनिया झुकती
था उसका नाम विवेकानन्द
जीना उसने है सिखलाया
वरना  हम क्या क्या करते
अपने लिए  तो सब जीते है
पर जीना आये  दूसरो  काम
था नाज जिसे अपनी धरती पर
कर गया संसार  नाम वो
है सबमे साहस  मानवता का
 सिखला गया साहस का पाठ वो,
ना  जात्ती पाती न उच नीच
सब है बराबर
इस  जहा में
ऐसा पाठ  पढ़ाया  उसने
देशप्रेम की ललक उठे
सिखलाया की  कैसे हो
नए समाज का सर्जन यहाँ
काटो पर चलकर  भी उसने
कर  दिया गर्व  से नाम अमर
हे नाज हर भारतवासी को 
 क्यों न होते आब विवेकानंद
छोटी सी आयु में ही
कर गए वो नाम अमर
अब हम सबकी है बारी
कर जाये एक नए समाज का
निर्माण यहाँ

3 टिप्‍पणियां:

sushma 'आहुति' ने कहा…

behtreen post....

Naveen Mani Tripathi ने कहा…
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Naveen Mani Tripathi ने कहा…

ऐसा पाठ पढ़ाया उसने
देशप्रेम की ललक उठे
सिखलाया की कैसे हो
नए समाज का सर्जन यहाँ
काटो पर चलकर भी उसने
कर दिया गर्व से नाम अमर
हे नाज हर भारतवासी को
क्यों न होते आब विवेकानं

Vivekanand ji ka darshan rashtr ki dhrohar hai ....sundar rachana ke liye sadar abhar Garima ji .