संदेश

प्यारा हिन्दुस्तान

आजादी मिले समय हुआ
फिर भी भारत न आज़ाद हुआ
माँ भारती है आज भी गुलाम
न बहनो का है सम्मान हुआ
मेरे प्यारे देश में हम हुए है गुलाम
न रोटी है न कपडा है और न ही है मकान
खून खराबा चोरी लूट
इसमें है हम नंबर एक
जाति धर्म पर लड़ना आया
पर जाति धर्म किसने बनाया
जो जवान है उनका होता है अपमान
मिट जायेंगे देश पर ये होते है जवान
प्यारा देश हमारा है
इसकी शान बढ़ाना है
दुनिया को सही राह दिखाना है
हिंदुस्तान को फिर से सोने की खान बनाना है
देश हमारा प्यारा प्यारा
हमें  सब बुराई से आज़ाद कराना है
माँ भारती के कदमो में
आज़ादी की मशाल जलाना है
भय भूख भस्ट्रचार  से
अपने प्यारे देश को आज़ाद कराना है
काम कठिन है लम्बी डगर है
माँ के सम्मान को फिर से बचाना है
-गरिमा 

नया साल नयी आशा

नया साल आ रहा है
नयी आशा ला रहा है
नए सपने मन को लुभा रहे है
लगता है कुछ नया होने वाला है
ठण्ड बढ़ती जा रही है
चारो तरफ नए साल की धूम है
अमीरो का नया साल मनता है होटलो में.
गरीबो का मनता है फुटपाथों पर
नयी आशा यही है की दूरी मिट जाएगी
नया साल नयी आशा लेकर आया है
प्यार का रंग होगा देश में
सबके चेहरे पर होगी ख़ुशी
आने वाला साल ख़ुशी अपार लाये
ढेरो सौगात लाये हम डूब जाये उन खुशियों में
नफरत की दीवार न रहे सबके बीच में
नयी ऊर्जा का प्रकाश हो
हर कोई मस्त हो नए साल में
कोहरे में लिपटी जिंदगी
नए साल का इंतजार कर रही है
नया साल नया खुशियाँ ला रहा है
-गरिमा

बचपन की यादें

बचपन की यादे कितनी अच्छी होती है
आज उन यादो को ताजा करना अच्छा लगता है
कहा खो गया वो बचपन वो हसीन दिन
जब न होती थी कोई फ़िक्र
खेल में जिंदगी के दिन बीतते थे
न पढ़ने की फ़िक्र न कुछ करने की फ़िक्र
पापा की डाट खाना माँ का लाड
सब बहुत याद आता है
अब सब कुछ कही खो गया है
न वो बचपन रहा और न वो लाड रहा
वो स्कूल जाना और माँ के हाथ का पराठा खाना
सब कुछ याद आता है
बड़ो के बाते सुनना उस को हसी में उड़ाना
फुर्सत में दादी से कहानी सुनना
सब बहुत याद आता है
अब न वो नानी दादी की कहानी रही
न वो माँ के हाथ का पराठा रहा
न वो लाड रहा
सब कुछ टीवी मोबाइल पर सिमट कर रह गया है
माँ के हाथ के खाने ने फ़ास्ट फ़ूड ने ले ली है
बचपन बहुत याद आता है
-गरिमा

महिला दिवस

शक्ति का रूप है नारी
प्रेम की छाँव है नारी
ठंडी हवा का प्यार है नारी
सेवा का भाव है नारी
विस्वास का नाम है नारी
कठिन समय में सही रह दिखती है नारी
प्यार का भाव जगती है नारी
हर रूप में हर हाल में खुश रहती है नारी
सबको खुशिया देती है नारी
जीवन का नया पाठ  पढ़ाती है नारी
जीवन अधूरा है नारी बिन
सबको राह  दिखाने वाली लुटती है नारी
क्यों है इसके सब दुश्मन
क्यों छीन लेते है इसकी खुशिया
प्यार और दुलार क्यों नहीं मिलता
शक्ति को इसकी पहचान नहीं मिलता
जीवन में खुशिया है नारी संग
नारी तू पहचान अपने में
शक्ति को जान अपने में
खुशिया है अपार तेरे में
प्रणाम है तुझको
-गरिमा

प्यास

प्यास बुझ जाती है एक घूट पानी से
जो न बुझती है प्यास वो है मृगतृष्णा की
जीवन है छलावा ये पता है सबको
फिर भी जीने की प्यास है सबको
दौलत शोहरत की प्यास बहुत तेज होती है
मानवता को मार रिश्तो का खून करती है
नए नए संसाधन को जुटाने में लगे है सभी
पर माँ पिता को पूछने की प्यास नहीं लगती है किसी को
सब मस्त है बाहरी दुनिया में
मरने का सच किसी को जानने की न होती है प्यास
हर समय बेटो की प्यास होती है
बेटी  की प्यास न होती किसी को
नेताओ को होती है कुर्सी की प्यास
अभिनेता को होती है ख्याति की प्यास
बाबाओ को होती है भक्तो  की प्यास
भक्तो को होती है दुःख मिटने की प्यास
दुःख सुख के चक्कर में जो फॅसा
उसे लगती है सहनभूति की प्यास
मन को जगा और बना ले भक्ति की प्यास
प्रेम करो  और प्रेम रुपी रौशनी की प्यास को जगाओ
और पूरे समाज में प्रेम  जगाओ
गरिमा 

प्याऱ हीँ ज़िन्दगी है वो प्यार चाहें पिता का हो  या किसी और  का  पिता से बड़ा कोई नहीं है  पिता आसमान है जिसकी  छाया में हम बड़े होते है  पिता हमें सही मार्ग दिखाता है  जिस पर चलकर हम आगे बढ़ते है  अपना सुख भूलकर हमें सुख देता है  ऐसे पिता को जब बच्चे भूल जाते है  उनको कितनी पीड़ा होती है  पिता का बड्डपन देखो   वो तब भी अपने बच्चो से गिला नहीं करता  पिता बहुत महान होता है  सभी पिताओ को मेरा प्रणाम  -गरिमा

धूप और छाँव

धूप और छाँव की  लुकाछिपी
कितनी अच्छी लगती है
धुप में जब थक जाओ
छाँव शीतलता देती है
धूप जीवन का कठोर समय है
छाँव ढलती शाम है
हे मानव ! तुम धूप से क्यों घबराते हो
कठिन परिश्रम करके तुम अपना
भाग्य बनाते हो
छाँव में जब तुम सबके साथ
अपना समय बिताते हो
कितना अच्छा लगता है
धूप छाँव का ये समय
जीवन का सच है
धूप छाँव का खेल
-गरिमा