बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

प्यार ही जीवन

प्यार ही जिंदगी है,
प्यार ही हर रंग  है,
प्यार ही मंदिर है,
प्यार ही देवता है ,
पर आज इस प्यार से सब महरूम है
प्यार कहा खो गया
पता नहीं
माँ बेटे के प्यार ,
पिता पुत्री की प्यार ,
भाई बहन का प्यार,
बहुत कम हो गया
सब पैसे के पुजारी हो गए
प्यार तो हवस मात्र रह गयी
हर रिश्ता गन्दा हो गया
पैसा ही प्यार बन गया
पैसा न हो तो पति को पत्नी  अच्छी  नहीं  लगती
पिता को पुत्र अच्छा नहीं लगता
सब पैसे के पुजारी हो गए
प्यार तो बस अब फिल्मो और टीवी में रह गया है
इस प्यार को कहा ढूँढे
ए दिल बता जरा
 प्यार ही जीवन है
ये सच  है कहा
-गरिमा

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19-02-2017) को
"उजड़े चमन को सजा लीजिए" (चर्चा अंक-2595)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक