रविवार, 18 जून 2017

प्याऱ हीँ ज़िन्दगी है
वो प्यार चाहें पिता का हो 
या किसी और  का 
पिता से बड़ा कोई नहीं है 
पिता आसमान है जिसकी 
छाया में हम बड़े होते है 
पिता हमें सही मार्ग दिखाता है 
जिस पर चलकर हम आगे बढ़ते है 
अपना सुख भूलकर हमें सुख देता है 
ऐसे पिता को जब बच्चे भूल जाते है 
उनको कितनी पीड़ा होती है 
पिता का बड्डपन देखो 
 वो तब भी अपने बच्चो से गिला नहीं करता 
पिता बहुत महान होता है 
सभी पिताओ को मेरा प्रणाम 
-गरिमा 

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

धूप और छाँव

धूप और छाँव की  लुकाछिपी
कितनी अच्छी लगती है
धुप में जब थक जाओ
छाँव शीतलता देती है
धूप जीवन का कठोर समय है
छाँव ढलती शाम है
हे मानव ! तुम धूप से क्यों घबराते हो
कठिन परिश्रम करके तुम अपना
भाग्य बनाते हो
छाँव में जब तुम सबके साथ
अपना समय बिताते हो
कितना अच्छा लगता है
धूप छाँव का ये समय
जीवन का सच है
धूप छाँव का खेल
-गरिमा 

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

शादी

   शादी कितनी अच्छी होती है
सात फेरो का बंधन, सात बचन का महत्व
पर आज शादी  क्या हो गयी है?
शादी हुई नहीं की बीबी पति को अपने साथ रखना चाहती है
शादी का मतलब सिर्फ मौज मस्ती रह गया है
बड़ो का लिहाज़ रह नहीं गया
क्या हो गया है आज सबको
शादी के बाद लोग थोड़े दिन तो सही रहते है
फिर सबके अहम् टकराने लगते है
आज कल की लडकिया भी काम करना चाहती है
दोनों लोगो का अहम् जब टकराता है
तो मामला गड़बड़ हो जाता है
शादी का लड्डू जो खाये पछताए
जो न खाये पछताए
शादी मन का रिश्ता है
जिसे प्रेम से निभाना होता है
-गरिमा 

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

प्यार ही जीवन

प्यार ही जिंदगी है,
प्यार ही हर रंग  है,
प्यार ही मंदिर है,
प्यार ही देवता है ,
पर आज इस प्यार से सब महरूम है
प्यार कहा खो गया
पता नहीं
माँ बेटे के प्यार ,
पिता पुत्री की प्यार ,
भाई बहन का प्यार,
बहुत कम हो गया
सब पैसे के पुजारी हो गए
प्यार तो हवस मात्र रह गयी
हर रिश्ता गन्दा हो गया
पैसा ही प्यार बन गया
पैसा न हो तो पति को पत्नी  अच्छी  नहीं  लगती
पिता को पुत्र अच्छा नहीं लगता
सब पैसे के पुजारी हो गए
प्यार तो बस अब फिल्मो और टीवी में रह गया है
इस प्यार को कहा ढूँढे
ए दिल बता जरा
 प्यार ही जीवन है
ये सच  है कहा
-गरिमा

बुधवार, 18 जनवरी 2017

बर्फ की जिंदगी

बर्फ की जिंदगी कितनी कठिन होती है
हर समय पत्थर  बने रहना,
धूप की जब किरणे परी
तो पिघलना शुरू हो गया
बर्फ से मिलती जिंदगी है
रिश्ते  जिनको हम बर्फ की तरह कठोर बना देते है
हम अपनी मै में खो जाते है
कोई भी बड़ा अपनी धूप  रुपी बुद्धि देना भी चाहे,
तो हम लेना नहीं चाहते
क्यों?
क्योकि हम बर्फ की तरह कठोर हो जाते है
तो हमें सबकी बात खराब लगती है
रिश्ते पूछते है
की क्या हम इसी तरह जमे रहेंगे ?
क्या कोई गर्मी इन रिश्तो  पिघला पायेगी
हर घर में बर्फ जमी है
कोई नहीं चाहता की सूरज की रौशनी पड़े
और रिश्तो पर पड़ी बर्फ पिघलने लगे
-गरिमा

रविवार, 1 जनवरी 2017

नया साल कुछ ऐसा हो

नया साल में नयी चीजे हो
भारत से भूख गरीबी दूर हो
पेप्सी कोला बंद हो
बर्गर पीजा बंद हो
सब लोग भारतीय भोजन करे
महँगाई घटे बेतन बढे
लोगो में भाईचारा हो
भाई भाई से न  लड़े
प्यार ही प्यार बढे
लड़की की हत्या न हो
बहू कोई जलाई न जाये
बहू को बेटी समझा जाये
सांसद लड़ाई न करे
जनता को बुद्धू न बनाये
जनता का हित सब सोचे
उनके दुःख  दर्द सब समझे
बेटा माँ पिता को माने
बहू  सास को माँ माने
सब तरफ प्यार ही प्यार फेले 
ऐसा नया साल हो मेरा
-गरिमा