बुधवार, 7 सितंबर 2016

शिक्षक दिवस

पहला गुरु हमारी माँ होती है.
हमारा ज्ञान जो बढ़ाते है  वो हमारे गुरु  होते है
गुरु हमें  दुनिया की बाते सिखाते है
गुरु हरदम पूजनीय होते है
जो भी हम बनते है
वो गुरु के सीखने से ही बनते है
अगर गुरु न मिले तो जीवन भटक जाता है
गुरु के   बिना ज्ञान अधूरा है
जब हम अच्छा करते है  तो हमारा उत्साहवर्धन करते है
और गलितयों पर हमें  समझाते है
श्री कृष्ण और हनुमान  भी
गुरु के आगे शीश नवाते है
गुरु महान होते है
उन्हें शत शत प्रणाम
- गरिमा 

2 टिप्‍पणियां:

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन नीरजा भनोट और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको . कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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