सोमवार, 2 फ़रवरी 2015

विरासत


हमें नदिया फूल
पानी सब मिला विरासत में,
 फिर हम इसे क्यों करते है बर्बाद,
ये न हो तो क्या जीवन संभव है
पर हम इन्हें बर्बाद कर रहे  है
फिर कोसते   है  भगवान को
की  बारिश  नहीं हो रही  है
सूखा पड़  रहा है,
जो हमें मिला है उसकी
हम रक्षा नहीं कर पा  रहे है,
तो भगवान् को क्यों  दोष देते है
जो हमें मिला उसकी रक्षा करे,
और पेड़ लगाये
अपनी विरासत को बचाये

अब देश में न आना तुम गाधी

अब देश में न आना तुम गाधी
ये देश अब रहने के लायक बचा नहीं
हर तरफ हिंसा है, भष्टचार फैला है
हे गांधी न आना अब इस देश तुम
थाना कोर्ट कचहरी करके न कर
पायोगो सत्याग्रह
जब चलेगी लाठी डंडा
तब तुम क्या कर पायोगो
अगर न होगा स्विस बैंक में एकाउंट
तो क्या तुम कर पायोगे
हे गांधी न आना अब इस देश तुम
खादी हो गयी इतनी मंहगी
कैसे चरखा चलाओगे
देश की हालात पर आयेगा रोना
फिर तुम ऑसू बहाओगे
कैसे जायोगे लाल किला तुम
और कैसे झण्डा फेहराओगे
हे गांधी न आना अब इस देश तुम
आरक्षण की हवा चली है
कैसे इसे मिटायोगे
दारु और दवा मंहगी है
कैसे गरीब का भूख मिटायोगे
हे गांधी न आना अब इस देश तुम