रविवार, 16 नवंबर 2014

हम सब एक है

एक धरती एक उपवन
हम सब उसके बासी है
मिली धूप हमें एक बराबर
मिटटी के कर्ण के सामान हम
रूप रंग हो भले अलग हमारे
पर मन से हम एक  है
अलग अलग  है बोली हमारी
हम सब  फिर भी  एक है
सूरज एक हमारा है
जो किरणे फैलाता है
देता है रौशनी हमको
जग का  अँधेरा मिटाता है
एक चाँद है जो देता है
शीतलता हमको
फिर भी हम सब  एक है
कितना कुछ दिया हमको
पर हम समझ  न पाए
लड़ते  रहते है हम सब
क्यों न प्यार की भाषा समझाए
हम सब एक है ये सबको  बताये

कोई टिप्पणी नहीं: