रविवार, 9 नवंबर 2014

पिता

पिता एक वृक्ष के सामान
होता है,
जिसकी छाया में बच्चे अपना
घर बनाते है
और माँ होती है उसकी छाया
पिता की बाहें होती है मजबूत
सबको साथ लेकर चलती है
जाड़ा हो या गर्मी वो सब सह कर
भी देता है बच्चो को सुरक्षा
अपनी सुख की   परवाह न करते
देता है ख़ुशी अपने बच्चो को
पिता होता है महान
हर छोटी छोटी बातों का रखता है ख्याल
सब माँ को देते है सम्मान
पर दोनों का है काम महान
पिता न हो तो अधूरा है जीवन
पिता है सारे घर की शान
लोरी नहीं सुनाता है तो क्या
बच्चो को घूमता है वो
उसके साथ बच्चे भी होते है खुश
पिता को भी मिलना चाहिये सम्मान

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