गुरुवार, 30 अक्तूबर 2014

नया सवेरा

नया सवेरा आया
बहुत सारी  खुशियाँ  लाया
पर्वत पर छायी लाली
दुनिया में एक नया दिन आया
सब तरफ छायी खुशियाँ
नया सवेरा आया
सबके घर  में आने वाली ढेर सारी खुशियाँ
भागेगा अँधेरा आयेगा उजाला
सबको मिलेगी अपनी मंजिल
गरीबी जायेगी सबके हाथो होगी तरक्की
नया सूरज लाया अपार खुशियाँ
बच्चो को मिली उनकी खुशियाँ
सबको मिला पढ़ने का अधिकार
देश का दिन भी है बदलने वाला
नया सूरज सबके लिए लाया
ढेरो खुशियाँ
हर तरफ है खुशियाँ बिखरी
सबके आँगन महका
नया सवेरा आया

शुक्रवार, 17 अक्तूबर 2014

हिंदी की दुर्दशा

एक और हिंदी दिवस आ गया
और हमने हिंदी को  याद कर  लिया लिया
 तो क्या मात्र हिंदी दिवस
मना लेने से इतिश्री होगा
 हिंदी  की   दुर्दशा का  क्या  कहना
आज तो अंग्रेजी भी  हिंदी में मिलने लगी है
  आलम यह है कि हर जगह 
अंग्रेजी  का असर है
अब तो हिंदी भी अंग्रेजी का गुलाम हो गयी है,
आज हिंदी रोती है
कि आने वाली मुझे कैसे समझेगी
मात्र हिंदी दिवस पर हिंदी को याद
कर लेना काफी नहीं
हिंदी चीखकर कह रही है
कि मुझे बचाओ ! मुझे बचाओ
पर उसकी चीख सुनकर भी हम
अनसुना कर देते है