मंगलवार, 13 मई 2014

विरह वेदना

सजना गए परदेस
हमको काहे  भूल गए
कोई दिन,  कोई महीना
 न हो ऐसा जब तुम हमको
न  आते हो याद सजना
का  ऐसी भूल हो गयी
जो  तुम हमको भूल गए
कैसे कहु हाल दिल का
अब तो सूनी सारी राहे
नैना तरस गए तेरे मिलने को
कब आओगे मेरे सजना
हम आस लिए बैठे  है
हम है तेरे बिन अधूरे
अब  तो मान भी जाओ सजना
आ जाओ  तुम लेकर कंगना 

3 टिप्‍पणियां:

मीनाक्षी ने कहा…

विरह भाव दिखाती , मिलने की आस जगाती रचना..

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

वाह सुन्दर रचना

rajendra tela ने कहा…

virah kee vednaa kaa sundar chitran