शनिवार, 31 मई 2014

भारत जैसा कुछ नहीं

   भारत जैसा कोई नहीं
सोने की चिड़िया कहलाता है
यहाँ सब कुछ मिलता है,
प्यार भी मिलता  है यहाँ पर
पर क्या हुआ मेरे भारत को
प्यार की जगह नफरत ने ले ली
 क्यों हो  गए ऐसे लोग मेरे देश देश के
जहा  बहती थी प्यार की की धारा
 वहाँ बहती है खून की   धारा
जहा होती है देवी  की पूजा
वही आज लड़कियों को कुछ नहीं समझा जाता
क्या हुआ मेरे देश को
किसकी नज़र लग गयी  देश को

मंगलवार, 13 मई 2014

विरह वेदना

सजना गए परदेस
हमको काहे  भूल गए
कोई दिन,  कोई महीना
 न हो ऐसा जब तुम हमको
न  आते हो याद सजना
का  ऐसी भूल हो गयी
जो  तुम हमको भूल गए
कैसे कहु हाल दिल का
अब तो सूनी सारी राहे
नैना तरस गए तेरे मिलने को
कब आओगे मेरे सजना
हम आस लिए बैठे  है
हम है तेरे बिन अधूरे
अब  तो मान भी जाओ सजना
आ जाओ  तुम लेकर कंगना